यूपी ट्रांसपोर्टर्स ने की GST प्रवर्तन कार्रवाई में बदलाव की मांग, व्यापारी पर हो एक्शन
उत्तर प्रदेश मोटर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ने राज्य में परिवहन व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रादेशिक बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में प्रदेश भर के प्रभारियों और परिवहन व्यवसायियों ने भाग लिया, जहां उन्होंने दैनिक स्तर पर आ रही चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्य रूप से, राज्य माल सेवाकर (GST) प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन के नाम पर की जा रही अव्यवहारिक कार्रवाई पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। UP Transporters का कहना है कि इन कार्रवाइयों का सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स पर पड़ता है।
एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से यह सुझाव दिया कि प्रवर्तन कार्रवाई ट्रांसपोर्टर के बजाय सीधे पंजीकृत व्यापारी के विरुद्ध की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि माल का स्वामित्व व्यापारी के पास होता है, इसलिए जवाबदेही भी उनकी होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, बैठक में 50 हजार रुपये की ई-वेबिल बाध्यता को समाप्त करने की मांग भी उठाई गई, जिसे अनावश्यक बोझ बताया गया।
अन्य महत्वपूर्ण मांगों में वन टाइम टैक्स को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लागू करना शामिल था, जिससे ट्रांसपोर्टरों को लचीलापन मिल सके। साथ ही, एआईएस-140 मानक जीपीएस में केंद्र से अनुमोदित सभी कंपनियों को अनुमति देने की मांग की गई, ताकि एकाधिकार खत्म हो और प्रतिस्पर्धा बढ़े। ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटरों में कथित अवैध वसूली को रोकने के लिए 18 नए सेंटर विकसित करने और दुर्घटना की स्थिति में माल बीमा को अनिवार्य बनाने के लिए कानून में संशोधन की भी मांग की गई। इन बदलावों से राज्य में परिवहन क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने और व्यापारिक माहौल में सुधार होने की उम्मीद है।
