लखनऊ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर बुजुर्ग से 80 लाख ठगने की कोशिश, Bank official ने बचाया
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर जालसाजों ने एक सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर को ढाई घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। जालसाजों ने खुद को पुणे एटीएस का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को वीडियो कॉल किया और उन पर पहलगाम आतंकी हमले में टेरर फंडिंग का आरोप लगाया। जालसाजों ने बुजुर्ग को धमकी दी कि अगर उन्होंने पैसे ट्रांसफर नहीं किए तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।
गोमतीनगर स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अंचल कार्यालय में यह घटना हुई। बुजुर्ग, जो कि नगर निगम के सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर हैं, जालसाजों की धमकियों से डरकर बैंक में कोने में बैठे थे। वह अपने खातों से 80 लाख रुपये निकालने की योजना बना रहे थे, ताकि जालसाजों द्वारा बताए गए खातों में रकम ट्रांसफर कर सकें।
बैंक के विधि अधिकारी मनीष सिंह ने बुजुर्ग को घबराया हुआ देखा। सर्दी के मौसम में भी उनके माथे पर पसीना था। मनीष सिंह ने जब उनसे पूछताछ की तो बुजुर्ग ने पहले तो कुछ भी बताने से मना कर दिया। काफी समझाने के बाद उन्होंने पूरी बात बताई।
इसके बाद जब जालसाजों का दोबारा वीडियो कॉल आया तो विधि अधिकारी मनीष सिंह ने फोन ले लिया और जालसाजों को जमकर फटकार लगाई। मनीष सिंह ने कहा कि पुलिस कभी भी किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती है और यह ठगी का प्रयास है। उनकी फटकार के बाद जालसाजों ने फोन काट दिया। विधि अधिकारी की सूझबूझ से बुजुर्ग 80 लाख रुपये की ठगी का शिकार होने से बच गए।
बैंक के अंचल प्रबंधक अमित गोयल और उप अंचल प्रबंधक संजु कुमारी ने बुजुर्ग को समझाया कि पुलिस कभी भी इस तरह से कार्रवाई नहीं करती है। उन्होंने विधि अधिकारी मनीष सिंह के सराहनीय कार्य के लिए उन्हें सम्मानित भी किया। विधि अधिकारी ने तत्काल साइबर क्राइम सेल पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।
