मेरे जन्म पर कान में अजान नहीं, CPI का मेनिफेस्टो पढ़ा गया था: Javed Akhtar news
मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने रविवार को लखनऊ में आयोजित 36वें कॉमरेड शंकर दयाल तिवारी स्मृति समारोह में अपनी जिंदगी के कई पहलुओं पर खुलकर बात की। उन्होंने अपने जन्म से जुड़ा एक किस्सा साझा किया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। अख्तर ने बताया कि उनके जन्म के समय उनके कान में अजान नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) का मेनिफेस्टो पढ़ा गया था।
जावेद अख्तर ने बताया कि उनका जन्म ग्वालियर में हुआ था। जब वह पैदा हुए, तो उनके वालिद (पिता) के कम्युनिस्ट दोस्त अस्पताल में उन्हें बधाई देने आए थे। दोस्तों ने उनके पिता से कहा कि बच्चे के कान में अजान पढ़ी जाती है। इस पर उनके वालिद ने एक कॉमरेड के पास मौजूद सीपीआई का मेनिफेस्टो लिया और उसे उनके कान में पढ़ा। अख्तर ने कहा कि यह घटना उनके जीवन की दिशा तय करती है, जहां धर्म से ज्यादा विचारधारा को महत्व दिया गया।
धर्म और राष्ट्रीयता पर विचार
जावेद अख्तर ने धर्म और राष्ट्रीयता के बीच संबंधों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उनसे अक्सर पूछा जाता है कि पहले धर्म या देश। नास्तिक होने के कारण उन्हें यह फायदा मिलता है कि उनके सामने सिर्फ देश है। उन्होंने कहा कि धर्म और मजहब सिखाते हैं कि अच्छा करोगे तो अच्छा होगा और बुरा करोगे तो बुरा होगा। लेकिन डर और लालच कभी नैतिकता नहीं हो सकते।
सोशल मीडिया पर नकारात्मकता
जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया की बढ़ती नकारात्मकता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है। उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर 85 प्रतिशत चीजें झूठी होती हैं, हालांकि 15 प्रतिशत सच भी होता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि सोशल मीडिया की बातों को ज्यादा तवज्जो नहीं देनी चाहिए।
लखनऊ से जुड़ी यादें
अख्तर ने अपने ननिहाल रुदौली और ददिहाल खैराबाद की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि वह अपने ननिहाल पहली बार पांच साल की उम्र में गए थे, लेकिन वहां का घर उनकी आंखों में बस गया था। वर्षों बाद जब वह दोबारा रुदौली गए, तो उन्हें घर की हर सीढ़ी और खिड़की तक याद थी। उन्होंने अपनी पढ़ाई काल्विकन तालुकेदार्स कॉलेज से होने का भी जिक्र किया।
