Agra Voter List Controversy: फॉर्म भरने के बाद भी हटे हजारों नाम, स्थानीय प्रशासन पर उठे सवाल
आगरा में मतदाता सूची से हजारों मतदाताओं के नाम हटा दिए जाने का मामला सामने आया है, जिससे लोगों में नाराजगी है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत, कई ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो गए जिन्होंने फॉर्म भरकर अपनी नागरिकता की पुष्टि की थी। यह घटना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, खासकर जब लंबे समय से मतदाता सूची में शामिल लोगों के नाम भी हटा दिए गए हैं।
मतदाताओं की शिकायतें और प्रशासन पर सवाल
कैंट निवासी जयवीर बघेल, जो 25 साल से मतदाता थे, और उनके परिवार के सदस्यों ने गणना प्रपत्र भरा था, लेकिन उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिया गया। इसी तरह, फतेहाबाद की सीमा, जिनका नाम 19 साल से सूची में था, और उनके बेटे का नाम भी सूची से काट दिया गया। इन मतदाताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। यह केवल कुछ उदाहरण हैं; जिले भर में करीब 10,000 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिनमें से कई 19 से 25 साल तक से मतदाता सूची में थे।
विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में गिरावट
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान से पहले, जिले की नौ विधानसभा क्षेत्रों में कुल 36 लाख मतदाता थे। अभियान के बाद, 8.37 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जिससे वर्तमान में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 27.63 लाख रह गई है। इसमें 15.25 लाख पुरुष और 12.37 लाख महिला मतदाता शामिल हैं। सबसे अधिक मतदाता एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र में 3.82 लाख हैं, और इसी क्षेत्र से सबसे अधिक 1.80 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं।
जनता पर प्रभाव और आगे की कार्रवाई
आवास विकास कॉलोनी के विश्वास सिंह ने बताया कि 21 साल पहले सूची में नाम जुड़ने के बाद हर चुनाव में मतदान किया, लेकिन फॉर्म भरने के बावजूद उनका नाम हटा दिया गया। शास्त्रीपुरम के कपिल गुप्ता ने भी परिवार के पांच में से तीन सदस्यों के नाम कटने की बात कही और बीएलओ द्वारा फॉर्म-छह भरने का सुझाव दिया गया। इस तरह की घटनाओं से मतदाताओं में भ्रम और असंतोष फैल रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके मतदान के अधिकार को प्रभावित करता है। प्रशासन से स्पष्टीकरण और सुधारात्मक कार्रवाई की उम्मीद है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी योग्य मतदाता को सूची से अनावश्यक रूप से न हटाया जाए।
