कानपुर: फर्जी डिग्री मामले में अधिवक्ता आशीष शुक्ला की जमानत अर्जी खारिज, जानें क्या है पूरा मामला
कानपुर की जिला अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ग्रेजुएशन और विधि की डिग्री प्राप्त करने के आरोपी अधिवक्ता आशीष शुक्ला की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जिला जज अनमोल पाल ने अपने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने का पर्याप्त आधार नहीं है। इस मामले में अधिकतम सात वर्ष के कारावास का प्रावधान है।
यह मामला तब सामने आया जब बार एसोसिएशन के मंत्री अधिवक्ता अरिदमन सिंह ने कोतवाली थाने में आशीष शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। आरोप है कि आशीष शुक्ला ने इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट बनवाकर दाखिला लिया और फिर ग्रेजुएशन व लॉ की डिग्री हासिल की। यह आरोप भी है कि इन डिग्रियों के आधार पर उन्होंने विभिन्न अदालतों में वकालत भी की।
सरकारी वकील दिलीप अवस्थी के अनुसार, 42 पेज के आदेश में जिला जज ने उल्लेख किया कि आरोपी ने इंटर परीक्षा में 52% अंक लाने का दावा किया था, जबकि क्राइस्ट चर्च इंटर कॉलेज के रिकॉर्ड के अनुसार वह 1994 में फेल हो गया था। कोर्ट ने यह भी पाया कि आरोपी ने अधिवक्ता के रूप में बार काउंसिल में पंजीकरण कराया और विभिन्न अदालतों में मुकदमों की पैरवी भी की, जो मामले को गंभीर बनाता है। न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया। इस फैसले से फर्जीवाड़े के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को बल मिला है।
