प्राइवेट मदरसों पर अफसरों की मनमानी से विवाद: मायावती, हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत
बसपा प्रमुख मायावती ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के उस फैसले का स्वागत किया है जिसमें कहा गया है कि सरकारी मान्यता न होना मदरसा बंद करने का आधार नहीं है। उन्होंने श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील हटाने के निर्देश को भी सराहनीय बताया। मायावती ने कहा कि कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं है, बल्कि जिला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी के कारण ऐसी अप्रिय घटनाएं सामने आती हैं। इस पर सरकार को उचित संज्ञान लेना चाहिए।
यह मामला आम जनता के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षा के अधिकार और सरकारी अधिकारियों द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग से जुड़ा है। अदालती फैसलों से यह सुनिश्चित होता है कि नियमों का पालन निष्पक्ष रूप से हो और किसी भी संस्थान को मनमाने ढंग से बंद न किया जाए।
इसके अतिरिक्त, मायावती ने देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में सत्रों की अवधि कम होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सत्रों का हंगामेदार और स्थगन के कारण जन-उपयोगिता घट रही है। लखनऊ में पीठासीन अधिकारियों के 86वें अखिल भारतीय सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त किया जाना उचित है। मायावती ने सरकार और विपक्ष से इस पर गंभीर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि संसद और विधानमंडलों की कार्यवाही साल में कम से कम 100 दिन शांतिपूर्ण ढंग से नियमों के अनुसार चलनी चाहिए।
