अन्ना मवेशियों से किसान परेशान, फसलों को बचाने की जद्दोजहद जारी
मैथा तहसील क्षेत्र में अन्ना मवेशियों की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। खेतों से लेकर सड़कों तक इन बेसहारा पशुओं का आतंक किसानों की नींद उड़ाए हुए है। किसान अपनी खड़ी फसलों को बचाने के लिए रात-दिन खेतों में रहकर रखवाली करने को मजबूर हैं। प्रतापपुर उदैत गांव में खेतों में घूमते अन्ना गोवंश इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं। गेहूं, सरसों, मटर, चना जैसी तैयार हो रही फसलों को ये मवेशी लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं।
जिम्मेदार अधिकारी मैथा क्षेत्र में केवल 885 जानवरों को गोशालाओं में संरक्षित करने का दावा कर रहे हैं, जबकि हकीकत में इनकी संख्या कहीं अधिक है। ढाकन शिवली, प्रतापपुर उदैत, भेवान, शेखूपुर, मैंथा, केसरी निवादा जैसे गांवों में आवारा पशुओं की धमाचौकड़ी मची हुई है। इनकी संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसका मुख्य कारण महंगाई है, जिसके चलते पशुपालकों के लिए जानवरों को घर पर रखना भी मुश्किल हो गया है। इसी मजबूरी में बड़े पैमाने पर इन जानवरों को छुट्टा छोड़ दिया गया है, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
किसानों पर चौतरफा मार पड़ रही है। खाद, पानी, बीज और मजदूरी की लागत बढ़ने के साथ-साथ अब उन्हें अन्ना मवेशियों से अपनी फसलों को बचाने के लिए सर्द रातों में भी रतजगा करना पड़ रहा है। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका पर गहरा प्रभाव डाल रही है।
