लखनऊ में विराट हिन्दू सम्मेलन: संगठित समाज ही कर सकता है राष्ट्र निर्माण – RSS
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रविवार को लखनऊ शहर में कई स्थानों पर भव्य हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज में जागृति, आत्मबोध और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करना रहा। विभिन्न वक्ताओं ने श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों के माध्यम से समाज में एकता, समरसता और भेदभाव रहित जीवन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
सम्मेलनों में आरएसएस के वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि समाज विरोधी और आसुरी शक्तियों का सामना केवल एक संगठित और जागरूक समाज ही कर सकता है। उन्होंने संगठन के विस्तार और सामाजिक एकता को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। छुआछूत, ऊंच-नीच और जातिवादी मानसिकता को समाप्त कर एक समरस हिन्दू समाज के निर्माण पर भी विशेष बल दिया गया।
एक अन्य सम्मेलन में वक्ताओं ने पश्चिमी सभ्यता के बढ़ते प्रभाव और भारतीय संस्कृति पर इसके असर पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में हुए परिवर्तनों के कारण मानसिक गुलामी को बढ़ावा मिला है और हमारे महापुरुषों को विकृत रूप में प्रस्तुत किया गया है। वक्ताओं ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि आज हिन्दू समाज आत्मगौरव के साथ अपनी पहचान स्वीकार कर रहा है, जबकि पहले लोग जनेऊ और तिलक करने में झिझकते थे।
इन सम्मेलनों के दौरान भारत माता का पूजन, आरती और समरसता भोज का भी आयोजन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में बच्चों ने भजन और नृत्य प्रस्तुत किए। संघ के पदाधिकारियों ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला और नागरिक कर्तव्य बोध के पालन से भारत को परम वैभव पर पहुंचाने का आह्वान किया।
