एनएचएम कर्मियों ने नियमित भर्तियों में वरीयता (priority) मांगी, शासन को भेजा प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों के लिए नियमित रिक्त पदों पर नियुक्ति में वरीयता की मांग उठाई है। संघ के प्रदेश महामंत्री योगेश उपाध्याय ने बताया कि लंबे समय से संविदा पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की उम्र भी बढ़ गई है। ऐसे में, सरकारी भर्ती प्रक्रिया में उनके अनुभव को देखते हुए वरीयता और आयु सीमा में छूट दी जानी चाहिए। इस संबंध में चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा गया है।
एनएचएम के संविदा कर्मी प्रदेश की प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता इन्हीं कर्मियों के भरोसे है। इसके बावजूद, नियमित भर्तियों में उनके अनुभव और सेवा अवधि को पर्याप्त मान्यता न मिलना चिंता का विषय है।
संघ के अनुसार, एनएचएम मिशन निदेशक ने 22 अगस्त 2024 को शासन को एक पत्र भेजकर संविदा कर्मियों को नियमित रिक्त पदों पर नियुक्ति में वरीयता देने का प्रस्ताव दिया था। अब संघ ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव से इस प्रस्ताव पर त्वरित निर्णय लेने का आग्रह किया है। वर्तमान में प्रदेश में आयुष, दंत चिकित्सक और हेल्थ एजुकेशन ऑफिसर जैसे पदों पर नियमित भर्ती की योजना है, और भविष्य में पैरामेडिकल व तकनीकी संवर्गों में भी भर्तियां हो सकती हैं।
संघ का कहना है कि एनएचएम के तहत कार्यरत अधिकांश संविदा कर्मी इन पदों के लिए आवश्यक योग्यता, पंजीकरण और अनुभव रखते हैं। पूर्व में एक्सरे टेक्नीशियन और नेत्र परीक्षण सहायक की भर्ती से जुड़े मामले का न्यायालय में विचाराधीन होना यह दर्शाता है कि एनएचएम कर्मियों को वरीयता देने का मुद्दा पहले से ही विधिक और नीतिगत चर्चा का हिस्सा रहा है।
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