लखनऊ में ‘राकू आर्ट’ वर्कशॉप का समापन, कलाकारों की कृतियों ने मोहा मन
लखनऊ के जानकीपुरम स्थित क्ले एन फायर स्टूडियो ने कला और कलाकारों के बीच संवाद को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की। यहां आयोजित नौ दिवसीय राकू फायरिंग वर्कशॉप का हाल ही में समापन हुआ, जिसके बाद प्रतिभागी कलाकारों द्वारा राकू तकनीक से निर्मित कलाकृतियों की एक आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी ने स्थानीय कला प्रेमियों और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा, जिससे शहर में कलात्मक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
राकू कला विधा का इतिहास 16वीं शताब्दी के जापान से जुड़ा है, जहां इसका विकास विशेष रूप से चाय समारोह की सौंदर्य परंपरा के अंतर्गत हुआ था। सादगी, अनिश्चितता और क्षणिक सौंदर्य इस कला के मूल तत्व माने जाते हैं। समय के साथ यह तकनीक पश्चिमी देशों तक पहुंची और इसमें रिडक्शन फायरिंग जैसे आधुनिक प्रयोग भी जुड़े, जिससे राकू कलाकृतियों में अप्रत्याशित रंग, अनूठी दरारें और धात्विक प्रभाव उभरकर सामने आते हैं। यह तकनीक मिट्टी को एक नया आयाम देती है।
इस कार्यशाला में देश के चार राज्यों से कुल 10 कलाकारों ने भाग लिया। इनमें भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से रवि कश्यप (लखीमपुर) और पायल सिंह (मऊ), आंध्र प्रदेश से कनूमोनू वेनू, गुरुग्राम से मालिया सहगल, उत्तराखंड के उधम सिंह नगर से नेहा सिंह, बनारस से स्वप्निल मौर्या एवं प्रीति वर्मा, कुशीनगर से सुशील यादव, बिहार से सुचिता सिंह तथा कानपुर से कोमल देवी शामिल थीं। कलाकारों ने ग्लॉसी और मैट जैसे दो प्रकार के ग्लेज का प्रयोग कर अपनी कृतियों में विविध दृश्य प्रभाव उत्पन्न किए, जो उनकी रचनात्मकता को दर्शाते हैं। मुख्य अतिथि भूपेन्द्र कुमार अस्थाना ने कलाकारों के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर प्रेम शंकर प्रसाद, विशाल गुप्ता, कमला राम, मनीषा श्रीवास्तव, प्रतीक नारायण, पावक नारायण सहित अनेक कला प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अनूठी कला का अनुभव किया।
