Germany student visa: जर्मनी में भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा, वीजा नियमों को लेकर फंसा पेंच
जर्मनी में उच्च शिक्षा का सपना लेकर गए सैकड़ों भारतीय छात्रों के लिए यह एक बुरे सपने जैसा बन गया है। बर्लिन की इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (IU) में दाखिला लेने वाले कई छात्रों को अब वीजा नोटिस मिल रहे हैं, जिससे उन्हें डिपोर्टेशन का डर सता रहा है। छात्रों ने लाखों रुपये की फीस और शिक्षा ऋण लेकर जर्मनी में पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन अब उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
यह संकट इसलिए पैदा हुआ है क्योंकि इमिग्रेशन अथॉरिटी (अप्रवासन प्राधिकरण) अब छात्रों के हाइब्रिड और ऑनलाइन प्रोग्राम को वीजा नियमों के अनुरूप नहीं मान रही है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने इन-पर्सन डिग्री प्रोग्राम के लिए दाखिला लिया था, लेकिन अब अधिकारियों का कहना है कि ये कोर्स फेस-टू-फेस स्टडी की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं।
इस स्थिति ने छात्रों के लिए गंभीर परिणाम पैदा किए हैं। कई छात्रों ने 20,000 यूरो (लगभग 18 लाख रुपये) से अधिक का निवेश किया है, जो अक्सर भारत में लिए गए शिक्षा ऋण से आता है। अब उन्हें बताया जा रहा है कि उन्हें अपनी पढ़ाई भारत से ही पूरी करनी पड़ सकती है, जबकि उन्हें जर्मनी में कैंपस एजुकेशन का वादा किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा विशेषज्ञ इस स्थिति को जटिल बताते हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा में नियामक व्याख्याएं (regulatory interpretations) समय के साथ बदल सकती हैं। जब ये बदलाव बिना स्पष्टता या संक्रमण तंत्र के लागू होते हैं, तो छात्रों के लिए अनिश्चितता पैदा होती है जिन्होंने सद्भावना से काम किया है।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि दोष किसी एक संस्था या प्राधिकरण पर नहीं डाला जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय शिक्षा संस्थान, मध्यस्थ (intermediaries) और इमिग्रेशन अथॉरिटी के बीच समन्वय की कमी के कारण छात्र ऐसी स्थितियों में फंस जाते हैं, जिनसे वे खुद निपटने में सक्षम नहीं होते।
जर्मनी को लंबे समय से अमेरिका या ब्रिटेन जैसे देशों की तुलना में एक किफायती और पारदर्शी शिक्षा गंतव्य माना जाता रहा है। लेकिन इस तरह की घटनाओं से भारतीय परिवारों का भरोसा टूट सकता है जो अपने बच्चों को विदेश भेजने की योजना बना रहे हैं।
