यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: 13 शवों से DNA मिला, 10 की स्वजन से मैचिंग, 160 घंटे की मशक्कत
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 19 लोगों में से 13 शवों की पहचान के लिए डीएनए निकालने में वैज्ञानिकों की टीम को बड़ी सफलता मिली है। मथुरा पुलिस को भेजे गए परिजनों के रक्त नमूनों से 10 शवों का डीएनए मिलान हो गया है। यह सफलता आगरा की फोरेंसिक लैब में 160 घंटे की लगातार कोशिशों के बाद मिली है।
इस हादसे में नौ वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे और कई में आग लग गई थी, जिससे कई शव बुरी तरह जल गए थे। ऐसे में डीएनए निकालना वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती थी। आग में जलने के कारण कुछ शवों की हड्डियों और दांतों से डीएनए निकालना बेहद मुश्किल हो रहा था। टीम ने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करती रही।
10 शवों के डीएनए मिलान की रिपोर्ट सोमवार रात मथुरा पुलिस को सौंप दी गई है। इसके आधार पर मंगलवार को पुलिस मृतकों के परिजनों को बुलाकर शव सौंपने की प्रक्रिया शुरू करेगी। हालांकि, दो अन्य शवों से डीएनए निकालने के लिए दोबारा जांच की जा रही है, क्योंकि उनके नमूने परीक्षण के दौरान चूर-चूर हो रहे थे। तीन शवों के डीएनए का मिलान भेजे गए रक्त नमूनों से नहीं हो सका है, ऐसे में अन्य परिजनों के नमूने लिए जाएंगे।
आगरा फोरेंसिक लैब में डीएनए सेक्शन अप्रैल 2021 में शुरू हुआ था और यहां लगी मशीनों की कीमत करीब 15 करोड़ रुपये है। इस महत्वपूर्ण कार्य में संयुक्त निदेशक अशोक कुमार के निर्देशन में वैज्ञानिकों की टीम ने प्रदेश की अनुभवी डीएन विज्ञानी अनीता पुंढीर और प्रगति सिंह के साथ पवन कुमार एवं शशि शेखर पांडेय ने अहम भूमिका निभाई।
