चित्रकूट कोषागार Scam: 43 करोड़ के घोटाले में ED की एंट्री, 93 पेंशनरों के रिकॉर्ड तलब
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में हुए 43.13 करोड़ रुपये के कोषागार पेंशन घोटाले की जांच अब केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने हाथ में ले ली है। मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के चलते ईडी ने कोषागार विभाग से इस मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड तलब किए हैं। इसके बाद कोषागार विभाग ने 93 पेंशनरों से संबंधित सभी दस्तावेज लखनऊ स्थित ईडी के उप-जोन कार्यालय भेज दिए हैं।
ईडी ने इस मामले में राज्य पुलिस की एसआईटी से भी अब तक की जांच रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह ईडी की टीम चित्रकूट आकर मामले की गहन जांच कर सकती है। भेजे गए दस्तावेजों में 93 पेंशनरों की मूल पत्रावलियों की प्रमाणित प्रतियां, पेंशन भुगतान का विवरण, संबंधित बैंक खातों की जानकारी, विशेष ऑडिट रिपोर्ट और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं।
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच सात वर्षों में कोषागार के अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से यह घोटाला किया गया। आरोपियों ने फर्जी भुगतान आदेश जारी कर 93 पेंशनरों के खातों में अनियमित भुगतान किया। बाद में 10 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर पेंशनरों से रुपये निकलवाकर आपस में बांट लिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि कई खाते मृत पेंशनरों के नाम पर दोबारा खोले गए थे।
इस मामले में 17 अक्टूबर को कर्वी कोतवाली में वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने पटल सहायक लेखाकार संदीप श्रीवास्तव, सहायक कोषाधिकारी विकास सचान सहित 93 खाताधारकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब तक दो कोषागार कर्मी, 24 पेंशनर और छह बिचौलियों को जेल भेजा जा चुका है।
