AI से मिलेगी असीमित स्वच्छ ऊर्जा, वैज्ञानिकों को न्यूक्लियर फ्यूजन में मिली बड़ी सफलता
वैज्ञानिकों ने ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिससे असीमित स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा है। ब्रिटेन और ऑस्ट्रिया के शोधकर्ताओं ने गाइरोस्विन नामक एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपकरण विकसित किया है, जो न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टरों के भीतर अत्यधिक गर्म प्लाज्मा के व्यवहार का अनुकरण (simulate) कर सकता है। यह AI उपकरण उन जटिल गणनाओं को कुछ ही सेकंड में पूरा कर लेता है, जिन्हें पूरा करने में दुनिया के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटरों को कई दिन लग जाते हैं।
न्यूक्लियर फ्यूजन प्रतिक्रियाओं में मुख्य चुनौती प्लाज्मा की अस्थिरता है, जिसे टर्बुलेंस कहा जाता है। इस टर्बुलेंस के कारण प्लाज्मा अपने चुंबकीय पिंजरे से बाहर निकल जाता है, जिससे फ्यूजन प्रक्रिया की दक्षता कम हो जाती है। वर्तमान में, फ्यूजन प्रतिक्रिया को बनाए रखने का रिकॉर्ड वेंडेलस्टीन 7-एक्स फ्यूजन उपकरण के नाम है, जिसने 43 सेकंड तक फ्यूजन बनाए रखा। गाइरोस्विन जैसे AI उपकरण वैज्ञानिकों को विभिन्न परिस्थितियों में टर्बुलेंस के निर्माण को सटीक रूप से समझने और नियंत्रित करने में मदद करेंगे, जिससे फ्यूजन प्रतिक्रिया को अनिश्चित काल तक जारी रखना संभव हो सकेगा।
न्यूक्लियर फ्यूजन में पृथ्वी के लिए लगभग अनंत स्वच्छ ऊर्जा स्रोत बनने की क्षमता है। इसमें केवल ड्यूटेरियम और ट्रिटियम नामक हाइड्रोजन के दो समस्थानिकों की आवश्यकता होती है, और इसका एकमात्र उप-उत्पाद हीलियम है। इसका मतलब है कि इससे न तो लंबे समय तक रहने वाला रेडियोधर्मी कचरा उत्पन्न होगा और न ही ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होगा, जो पृथ्वी के पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं।
फ्यूजन रिएक्टर सूर्य के केंद्र में होने वाली प्रक्रियाओं की नकल करते हैं, जहां हाइड्रोजन परमाणु मिलकर हीलियम बनाते हैं। पृथ्वी पर एक ‘लघु तारा’ बनाने के लिए, प्लाज्मा को लगभग 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक गर्म करना होता है और फ्यूजन के लिए इसे पर्याप्त गर्म और सघन बनाए रखना होता है। चूंकि कोई भी पदार्थ इतने उच्च तापमान को झेल नहीं सकता, इसलिए वैज्ञानिक टोकामाक नामक अंगूठी के आकार के उपकरण में चुंबकीय पिंजरे का उपयोग करके प्लाज्मा को नियंत्रित करते हैं। गाइरोस्विन के सिमुलेशन से इंजीनियर इन चुंबकीय क्षेत्रों को सटीक रूप से समायोजित कर सकेंगे, जिससे एक स्थिर और निरंतर फ्यूजन प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी।
