भारत-ओमान CEPA समझौता: फ्री ट्रेड से भारतीयों पर क्या होगा असर?
भारत ने ओमान के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते (कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट, CEPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है और भारत का इस प्रकार का 17वां समझौता है।
CEPA दो या दो से अधिक देशों के बीच एक आर्थिक संधि है, जिसके तहत वे अपने बीच व्यापार किए जाने वाले अधिकांश सामानों पर कस्टम ड्यूटी को समाप्त करने या काफी हद तक कम करने पर सहमत होते हैं। इसके अतिरिक्त, यह समझौते पार्टनर देशों से आयात पर गैर-व्यापार संबंधी बाधाओं को कम करते हैं और सेवा निर्यात तथा निवेश को बढ़ावा देने के लिए नियमों को सरल बनाते हैं।
इस समझौते के तहत, ओमान भारत के कपड़ा, रत्न और आभूषण, चमड़ा, जूते, खेल का सामान, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान उत्पादों पर टैरिफ या कस्टम ड्यूटी हटा देगा। वहीं, भारत ओमान से खजूर, मार्बल और पेट्रोकेमिकल्स जैसे उत्पादों पर कोटे के साथ ड्यूटी में छूट देगा।
भारत ने पहले ही श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, UAE, मॉरीशस, आसियान देशों और EFTA देशों के साथ ऐसे व्यापार समझौते किए हैं। वर्तमान में भारत अमेरिका, न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ, चिली, पेरू और इज़राइल जैसे देशों के साथ भी ऐसे समझौतों पर बातचीत कर रहा है।
वित्त वर्ष 2025 में, भारत का ओमान को निर्यात 4.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें नेफ्था, पेट्रोल, मशीनरी और चावल जैसे उत्पाद शामिल थे। वहीं, आयात 6.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जिसमें मुख्य रूप से कच्चा तेल, एलएनजी और उर्वरक शामिल थे।
अपने हितों की रक्षा के लिए, भारत ने डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, सोना, चांदी, गहने, चॉकलेट, जूते और खेल के सामान जैसे 2,789 टैरिफ लाइनों को बहिष्करण या नकारात्मक श्रेणी में रखा है, जिन पर कोई छूट नहीं दी गई है।
