प्राइवेट स्कूलों की फीस ने तोड़ी मिडिल क्लास की कमर, CA ने बताया 12वीं तक का खर्च 22 लाख
भारत में मिडिल क्लास परिवारों के लिए शिक्षा हमेशा पहली प्राथमिकता रही है। लेकिन 2025 में इसके चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट और टीचर मीनल गोयल की एक लिंक्डइन पोस्ट ने देश भर में शिक्षा की बढ़ती लागत पर नई बहस छेड़ दी है। मीनल गोयल के लिंक्डइन पोस्ट के अनुसार, एक बच्चे को पहली से बाहरवीं कक्षा तक पढ़ाने का खर्च अब तकरीबन 22 लाख तक पहुंच गया है।
मीनल गोयल ने 2025 के आंकड़ों के आधार पर एक विस्तृत खर्च रिपोर्ट साझा की है। उनके अनुसार, एक “ठीक-ठाक” (Decent) स्कूल में पढ़ाई का खर्च कुछ इस तरह है। मीनल गोयल ने लिखा, “किताबें, ड्रेस, ट्यूशन, ट्रांसपोर्ट, गैजेट्स और कोचिंग, इन सब कुछ जोड़कर यह आंकड़ा आता है। प्रीमियम स्कूलों में तो यह खर्च दोगुना भी हो सकता है। 2025 में भारत में स्कूली शिक्षा की वास्तविक लागत वाकई डरावनी है। स्थिति इतनी विकट है कि कई अभिभावक अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं।”
नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस की 2024 की रिपोर्ट गोयल के दावों की पुष्टि करती है। पिछले एक दशक में शहरी प्राइवेट स्कूलों की फीस में 169% की वृद्धि हुई है, जो वेतन वृद्धि और महंगाई दर से कहीं अधिक है। दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में फीस में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है। लोकलसर्कल्स के 2025 के सर्वे के अनुसार, 81% अभिभावकों ने 10% या उससे अधिक की फीस वृद्धि का सामना किया, जबकि 22% ने तो 30% से अधिक की बढ़ोतरी झेली। हालांकि दिल्ली में फीस नियंत्रण के नियम हैं, लेकिन कई स्कूल अन्य शुल्क के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
आज भारतीय परिवार विकसित देशों जितनी फीस चुका रहे हैं, लेकिन गुणवत्ता के स्तर पर अब भी सवालिया निशान हैं। गोयल ने एक ऐसे दंपती का जिक्र किया है, जिन्होंने भारी मन से अपने बच्चे को स्कूल न भेजने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि यह शिक्षा में विश्वास की कमी नहीं बल्कि सिर्फ इसलिए था क्योंकि वे इसका भुगतान नहीं कर सकते थे।
