पटना में जाम और अतिक्रमण से मुक्ति के लिए 3 महीने का ‘महाअभियान’, 1 दिसंबर से शुरू होगी कार्रवाई
राजधानी पटना को जाम व अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए इस बार शासन गंभीर है। इसके लिए तीन माह का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एक दिसंबर से अतिक्रमण हटाओ मल्टी-एजेंसी विशेष अभियान दोबारा शुरू होगा।
छठे दिन शनिवार को प्रमंडलीय आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने इसका प्रभाव देखने के लिए कोतवाली से डाकबंगला-पटना जंक्शन, चिरैयाटांड पुल होते हुए कंकड़बाग तक औचक निरीक्षण किया। उनके साथ जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम, एसएसपी कार्तिकेयिकेय के शर्मा, एडीएम सिटी संजय कुमार सिंह, नगर आयुक्त यशपाल मीणा, जिला परिवहन पदाधिकारी उपेंद्र पाल समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी थे।
शासन का गंभीर रुख देखते हुए इस अभियान में जिला प्रशासन, नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, परिवहन, राजस्व, पथ निर्माण, स्वास्थ्य, पुलिस, अग्निशाम, पुल निर्माण निगम, दूरसंचार, वन प्रमंडल, विद्युत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया गया है। डीएम ने सभी संबंधित एसडीओ-एसडीपीओ को प्रभावी पर्यवेक्षण तो एसपी ट्रैफिक, एडीएम सिटी, एसपी ला एंड आर्ड, नगर निगम के अपर नगर आयुक्त व सिटी मजिस्ट्रेट सह प्रभारी दंडाधिकारी जिला नियंत्रण कक्ष की पांच सदस्यीय मानीटरिंग टीम भी बनाई है।
प्रमंडलीय आयुक्त ने पटना जंक्शन, मौर्यलोक, मल्टी-लेवल पार्किंग, तारामंडल, चिरैयाटांड, राजेंद्र नगर व कंकड़बाग क्षेत्रों का निरीक्षण कर यातायात प्रबंधन और अतिक्रमण उन्मूलन की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों को बताया कि जल्द ही स्टेशन क्षेत्र सहित पूरे शहर में सुगम यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि पटना जंक्शन गोलंबर के आसपास मंदिर, मस्जिद और न्यू मार्केट की भीड़ के कारण अक्सर जाम रहता है। साथ ही अतिक्रमण, अनियमित ऑटो-ई रिक्शा संचालन तथा मल्टी हब से बस निकलने के दौरान अव्यवस्था से भी परेशानी बढ़ती है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी लगातार संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर रहे हैं। अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए सोमवार को इसमें मेट्रो अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा।
महानगर ऑटो चालक संघ ने शनिवार को जिला प्रशासन एवं क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार से शहरी क्षेत्र में ऑटो चालकों के लिए परमिट जारी करने की मांग की। उन्होंने डीएम को ज्ञापन सौंपने के साथ कहा कि बार-बार मांग के बावजूद शहरी क्षेत्र में आटो व ई-रिक्शा चालकों को परमिट नहीं दिया जाना चिंता का विषय है।
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