समाजवादी पार्टी का आरोप: वीआरसी से जाति के आधार पर कर्मचारी हटाए गए
समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया से जुड़े मतदाता पंजीकरण केंद्रों (वीआरसी) में कार्यरत कर्मचारियों के साथ जातिगत भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में स्थापित वीआरसी पर कई वर्षों से सेवाएं दे रहे यादव और मुस्लिम कर्मचारियों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के दबाव में सेवा से बर्खास्त किया जा रहा है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने इस संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को एक ज्ञापन सौंपा है। पार्टी नेताओं केके श्रीवास्तव और राधेश्याम सिंह ने बुधवार को यह ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि फर्रुखाबाद जिले में जिला निर्वाचन अधिकारी की संस्तुति पर टीनम यादव, सुनील यादव और असलम खान जैसे कर्मचारियों को हटा दिया गया है। समाजवादी पार्टी ने इस कार्रवाई को तत्काल रोकने और हटाए गए कर्मचारियों को बहाल कर एसआईआर प्रक्रिया में उनकी सेवाएं पुनः शुरू करने की मांग की है।
इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में प्रयागराज, रायबरेली, गोंडा, जौनपुर और चित्रकूट जैसे जिलों में भी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। पार्टी का आरोप है कि इन जिलों के कई विधानसभा क्षेत्रों में वैध मतदाताओं के नामों को गलत तरीके से बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा श्रेणी तृतीय में सबमिट किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी ने इस मामले की जांच कराने और गणना प्रपत्रों को सही श्रेणी (प्रथम या द्वितीय) में जमा कराने का आग्रह किया है। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है और इस प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
