माओवादियों पर सुरक्षाबलों का शिकंजा, राशन-दवा के मोहताज, 20 किमी चलकर ठिकाना बदलने को मजबूर
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के घने जंगलों में कभी माओवादियों का दबदबा हुआ करता था, लेकिन अब सुरक्षाबलों के सघन तलाशी अभियान और लगातार दबाव के चलते उनकी स्थिति बेहद कमजोर हो गई है। पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र के गोंदिया में हाल ही में 11 माओवादियों के साथ आत्मसमर्पण करने वाली बालाघाट की माओवादी संगीता ने पूछताछ में बताया है कि शेष माओवादी अब राशन, पानी और दवाओं के लिए तरस रहे हैं।
सुरक्षाबलों के चौतरफा दबाव और मुठभेड़ में मारे जाने के डर से संगीता ने हथियार डाल दिए। उसने बताया कि माओवादियों को लगातार अपने ठिकाने बदलने पड़ रहे हैं। सुरक्षाबलों से बचने के लिए वे एक दिन में करीब 20 किलोमीटर तक पैदल चलकर बार-बार अपनी जगह बदल रहे हैं। माओवादियों के पास जरूरी दवाओं का भी भारी संकट है। संगीता, जो अपने दल में चिकित्सकीय सेवा देने में अग्रणी थी, घायल साथियों का उपचार करती थी और उसे दवाओं की अच्छी समझ थी। इसी वजह से दर्रेकसा दलम के बड़े माओवादी नेता उसे आत्मसमर्पण करने से रोक रहे थे। संगीता ने बालाघाट पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का तीन बार प्रयास किया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई थी।
सूत्रों के अनुसार, बालाघाट जिले में अब माओवादियों की संख्या बहुत कम रह गई है। 2016-17 में जहां जिले में 200-250 माओवादी सक्रिय थे, वहीं पिछले तीन सालों में 20 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं। कान्हा भोरमदेव दलम, टाडा दलम और परसवाड़ा दलम जैसे कई दल अब लगभग समाप्त हो चुके हैं। आत्मसमर्पण के बाद दर्रेकसा दलम भी लगभग खत्म हो चुका है। वर्तमान में केवल मलाजखंड दलम ही सक्रिय है, जिसमें 23 माओवादी बालाघाट के जंगल में मौजूद हैं।
शेष माओवादी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के जंगलों में भटक रहे हैं। इनमें से कई अन्य राज्यों में हथियार डालकर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। बालाघाट का एक प्रमुख माओवादी संपत अब बुजुर्ग हो चुका है, और दीपक भी आत्मसमर्पण करना चाहता है। सेंट्रल कमेटी सदस्य (सीसीएम) रामधेर के कुछ ही सहयोगी बचे हैं, जिनके पास आत्मसमर्पण ही एकमात्र विकल्प बचा है। रामधेर का मूवमेंट छत्तीसगढ़ और बालाघाट के बीच जंगल में बताया जा रहा है। पुलिस इन माओवादियों के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण करने वाले साथियों के मध्य प्रदेश कनेक्शन को भी खंगाल रही है, ताकि इस नेटवर्क को पूरी तरह से तोड़ा जा सके।
