गाजियाबाद: 99 वर्षीय महिला की सीने में दर्द से मौत, ओपीडी में मरीजों की भीड़
गाजियाबाद जिला संयुक्त अस्पताल की इमरजेंसी में मंगलवार को एक 99 वर्षीय बुजुर्ग महिला को सीने में तेज दर्द होने के बाद गंभीर हालत में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों द्वारा जांच के बाद महिला को मृत घोषित कर दिया गया। गोविंदपुरम निवासी राधा बिशन कुमारी को उनकी बेटी रंजना तिवारी, जो पूर्व में जिले में डीआईओएस रह चुकी हैं, अस्पताल लेकर पहुंची थीं।
इसी घटनाक्रम के समानांतर, शहर के सरकारी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों और वायु प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप के कारण मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जिला एमएमजी अस्पताल, संजयनगर स्थित संयुक्त अस्पताल और डूंडाहेड़ा अस्पताल की ओपीडी में कुल 3,651 मरीज पहुंचे, जिनमें 1965 महिलाएं, 1072 पुरुष और 512 बच्चे शामिल थे। इनमें से 344 मरीजों को बुखार था, जिसमें 69 बच्चे भी शामिल थे।
चिकित्सकों के अनुसार, वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ सर्दी के कारण गले में खराश, खांसी, जुकाम, बुखार, जोड़ों में दर्द, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। सांस के रोगियों के साथ-साथ निमोनिया और आंखों में जलन के मामले भी बढ़ रहे हैं। जिला एमएमजी अस्पताल में कुल 193 मरीजों का एक्स-रे कराया गया, जिनमें से 123 का चेस्ट एक्स-रे हुआ। सात मरीजों को रेफर किया गया और 28 को भर्ती किया गया।
फिजिशियन डा. आलोक रंजन ने सलाह दी है कि सांस लेने में दिक्कत, घबराहट या चलने पर सांस फूलने जैसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने गरम पानी से गरारे करने, भाप लेने, ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करने और घर के अंदर योग करने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त, बाहर निकलते समय मास्क पहनना और सुबह-शाम टहलना बंद करने की भी सिफारिश की गई है।
अन्य स्वास्थ्य संबंधी खबरों में, मंगलवार को सरकारी अस्पतालों में कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने वाले लोगों की संख्या 388 रही। इनमें 63 बच्चों सहित 147 लोग पहली डोज लेने वाले थे। जिला एमएमजी अस्पताल में 97 लोगों को पहली डोज दी गई, जबकि संयुक्त अस्पताल में 50 लोगों को पहली डोज लगाई गई।
एक अन्य सफल सर्जरी में, जिला एमएमजी अस्पताल के चिकित्सकों ने पटेल नगर निवासी 42 वर्षीय ममता के यूटरस से 7.30 किलोग्राम की फाइब्रॉइड गांठ निकाली। लंबे समय से दर्द से परेशान ममता आर्थिक तंगी के कारण ऑपरेशन नहीं करा पा रही थीं। डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन में गांठ को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया, जिससे महिला की जान बचाई जा सकी।
