“title”: “दुल्हिनगंज की तंग गलियों से विधानसभा अध्यक्ष तक: प्रेम कुमार का संघर्षमय सफर”,
“subtitle”: “साधारण पृष्ठभूमि से बिहार विधानसभा के सर्वोच्च आसन तक, प्रेम कुमार की जीवन यात्रा प्रेरणादायक है।”,
“summary”: “गयाजी के दुल्हिनगंज के एक साधारण परिवार से निकलकर डॉ. प्रेम कुमार ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष तक का सफर तय किया है। बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे प्रेम कुमार 1977 में भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने 1990 से लगातार नौ बार चुनाव जीतकर एक रिकॉर्ड बनाया है। उनका जीवन संघर्ष, संगठन और अटूट संकल्प का प्रतीक है, जो उन्हें इस महत्वपूर्ण मुकाम तक ले आया।”,
“content”: “गयाजी के मखलौटगंज स्थित दुल्हिनगंज की संकीर्ण गलियों से बिहार विधानसभा के अध्यक्ष पद तक का सफर डॉ. प्रेम कुमार के लिए किसी असाधारण यात्रा से कम नहीं है। 71 वर्षीय प्रेम कुमार का बचपन अत्यंत साधारण और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता श्याम नारायण राम यूनियन बैंक में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी थे और माता लालपरी देवी गृहणी थीं। इसी परिवेश में पले-बढ़े प्रेम कुमार के मन में राष्ट्रीयता के बीज बचपन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं द्वारा बोए गए थे।nnमहावीर उच्च विद्यालय में लगने वाली शाखा में स्वयंसेवक के तौर पर शुरुआत करने वाले प्रेम कुमार ने बाद में आजाद पार्क की शाखा का दायित्व भी संभाला। युवावस्था में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और छात्र आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। सूत्रों के अनुसार, 1974 के जेपी आंदोलन के दौरान प्रेम कुमार इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ संघर्ष में सबसे आगे थे। आंदोलन में उनकी सक्रियता के कारण उन्हें डीआईआर के तहत गिरफ्तार कर आठ महीने के लिए केंद्रीय कारावास भेजा गया था। जेल से रिहा होने के बाद भी उन्होंने भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व किया और स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत किया।nnआपातकाल के बाद, 1977 में प्रेम कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और सक्रियता को देखते हुए, तत्कालीन जिलाध्यक्ष ने उन्हें पार्टी का जिला महामंत्री नियुक्त किया। इसके बाद उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को जिले के सभी प्रखंडों में मजबूत करने का कार्य किया। 1990 में भाजपा ने उन्हें गया शहरी सीट से अपना उम्मीदवार बनाया और यहीं से उनकी ऐतिहासिक चुनावी जीत का सिलसिला शुरू हुआ, जो 2025 तक लगातार नौ बार जारी रहा।nnअपने राजनीतिक जीवन में प्रेम कुमार ने कई दिग्गजों को हराया। उन्होंने 1990 में सीपीआई के शकील अहमद खान को हराकर पहली जीत दर्ज की। इसके बाद 1995, 2000 और फरवरी 2005 में मसऊद मंजर को, अक्टूबर 2005 में कांग्रेस के संजय सहाय को, 2010 में सीपीआई के जलालउद्दीन अंसारी को, 2015 में कांग्रेस के प्रियरंजन उर्फ डिंपल को, और 2020 तथा 2025 में लगातार दो बार कांग्रेस के अखौरी ओंकार नाथ श्रीवास्तव को पराजित किया।nnलगातार नौ चुनावी जीत का यह रिकॉर्ड उन्हें बिहार की राजनीति में एक विशिष्ट पहचान दिलाता है। इसी अनुशासन, संगठनात्मक क्षमता और जनता के विश्वास का परिणाम है कि 71 वर्ष की आयु में वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष जैसे सर्वोच्च पद पर आसीन हुए हैं। यह यात्रा, जो दुल्हिनगंज की तंग गलियों से शुरू हुई थी, आज बिहार विधानसभा के सर्वोच्च आसन तक पहुंची है—यह वास्तव में संघर्ष, संगठन और अटूट संकल्प की एक अदम्य मिसाल है।”
