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संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला: मुख्यमंत्री धामी

By Dec 1, 2025

हरिद्वार में आयोजित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत को भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि आज के वैज्ञानिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक और आध्यात्मिक उत्थान में भारतीय ज्ञान परंपरा और देवभाषा संस्कृत का महत्वपूर्ण योगदान है।

मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखंड की सदियों पुरानी संस्कृत के केंद्र के रूप में रही विरासत का सम्मान करते हुए कहा कि राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा इसी परंपरा का सम्मान है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार विद्यालयों में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। इस दिशा में उन्होंने संस्कृत भाषा के उत्थान एवं विकास के लिए एक उच्च स्तरीय आयोग के गठन की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री धामी ने इस बात पर जोर दिया कि संस्कृत में वर्णित जीवन मूल्य एवं सांस्कृतिक विरासत अंतरराष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा पर लगातार चिंतन और मंथन हो रहा है, जिसका प्रमाण यह अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन है। उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया की कई भाषाओं की जड़ें संस्कृत से जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को एक आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने की पहल की गई है।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को छात्रवृत्ति भी उपलब्ध कराई जा रही है। संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए ई-संस्कृत शिक्षण प्लेटफार्म, मोबाइल एप्स और ऑनलाइन साहित्य के माध्यम से इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने संस्कृत को द्वितीय राजभाषा घोषित किया है। उन्होंने देवभूमि को प्राचीन काल से भारतीय ज्ञान परंपरा का केंद्र बताते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है।

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