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UN की आलोचना पर पाक का पलटवार: संविधान संशोधन पर बढ़ा विवाद

By Nov 30, 2025

पाकिस्तान ने अपने 27वें संवैधानिक संशोधन को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क की तीखी आलोचना को कड़े शब्दों में खारिज किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि संविधान में किसी भी प्रकार का संशोधन करना केवल देश के निर्वाचित सांसदों का अधिकार है और UN अधिकारी को राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित टिप्पणियों से बचना चाहिए। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान मानवाधिकारों और कानून के शासन का पूर्ण सम्मान करता है, लेकिन UN प्रमुख की टिप्पणी जमीनी हकीकत को नहीं दर्शाती है।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि वे मानवाधिकार प्रमुख के कार्य का सम्मान करते हैं, परंतु उन्हें पाकिस्तान की संसद द्वारा लिए गए निर्णयों का भी सम्मान करना चाहिए और ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए जिनसे गलतफहमी या पक्षपात झलके।

इससे पहले, शुक्रवार को वोल्कर टुर्क ने पाकिस्तान में इस संवैधानिक संशोधन को एक जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया था। उन्होंने चिंता व्यक्त की थी कि यह बदलाव कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श के बिना किया गया है, जिससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सैन्य जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।

यह संशोधन पड़ोसी देश में शुरू से ही एक बड़े राजनीतिक बहस का विषय रहा है। 12 नवंबर को संसद की संयुक्त समिति द्वारा इस विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद, विपक्षी दलों ने इसे सर्वोच्च न्यायालय के लिए खतरा करार दिया था।

इस संशोधन के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 243 में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसमें संयुक्त प्रधानों के संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) के पद को समाप्त कर दिया गया है और उसके स्थान पर एक नए पद ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (CDF) का सृजन किया गया है। इसके अतिरिक्त, एक संघीय संवैधानिक न्यायालय की स्थापना और सर्वोच्च न्यायालय की कुछ शक्तियों को कम करने का प्रस्ताव भी शामिल है। यह संभावना जताई जा रही है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर, जिन्हें हाल ही में भारत के साथ सीमा पर बढ़े तनाव के बाद फाइव-स्टार फील्ड मार्शल रैंक से नवाजा गया था, वे पहले CDF नियुक्त किए जा सकते हैं।

हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से CDF की नियुक्ति की अधिसूचना जारी नहीं की है, जबकि CJCSC का पद गुरुवार को आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है। यह स्थिति पाकिस्तान में सत्ता के पुनर्गठन और सैन्य प्रभाव को लेकर चल रही अटकलों को और हवा दे रही है।

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