औरंगजेब को महान बताने वाली विचारधारा आज भी सक्रिय: डॉ. कृष्ण गोपाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने एक महत्वपूर्ण विचार को रेखांकित करते हुए कहा है कि औरंगजेब को महान बताने वाली विचारधारा आज भी देश में सक्रिय है और युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा पीढ़ी को सही इतिहास से अवगत कराना और इस विकृत विचारधारा का पुरजोर विरोध करना अत्यंत आवश्यक है ताकि वे गुमराह न हों।
विज्ञान भवन में नौवें पातशाही साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज के बलिदान की 350वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समागम को संबोधित करते हुए डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि औरंगजेब की महानता का गुणगान करने वाले आज भी मौजूद हैं। उन्होंने चेताया कि इतिहास को छिपाने या तोड़े-मरोड़े जाने से सत्य कभी छिपता नहीं। उन्होंने कहा कि यही वह असहिष्णु विचारधारा थी जिसके विरोध में श्री गुरु तेग बहादुर जी ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इसी विचारधारा ने देश के विभाजन जैसी भयावह त्रासदी को जन्म दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विचारधारा की यह लड़ाई आज भी जारी है, जिसमें एक वर्ग अपनी बात मनवाने पर अड़ा है, जबकि दूसरा वर्ग सबको साथ लेकर चलने के भारतीय मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने गुरु तेग बहादुर के बलिदान की पृष्ठभूमि को समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी भी सभ्यता के साथ समन्वय न करने वाली आक्रांता विचारधारा और भारतीय परंपरा के सहिष्णु विचार के बीच था। भारतीय विचार हजारों मतों को एक साथ मिलकर रहने की अनुमति देता है, जबकि आक्रांता अपने मतांतरण के उद्देश्य से आए थे।
इस समागम में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करते हुए पंजाब एंड सिंध बैंक के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चरन सिंह ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब ने अपने बलिदान से पूरे विश्व को यह संदेश दिया है कि आध्यात्मिकता ही भौतिकता का सही मार्गदर्शक हो सकती है। उन्होंने मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर कर देने के महान संदेश को रेखांकित किया। दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जस्टिस तलवंत सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बलिदान का यह दिन आत्ममंथन का अवसर है, ताकि हम गुरु तेग बहादुर के संदेश को अपने जीवन में उतार सकें।
