0

लाखों का पंचायत भवन बना डेरा, सरकारी उदासीनता पर सवाल

By Nov 29, 2025

बिहार के आरा जिले में ग्रामीण विकास की मंशा से बनाए गए पंचायत सरकार भवन आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। बिहिया प्रखंड की पिपरा जगदीश पंचायत के पिपरा जगदीश गांव के समीप बना पंचायत सरकार भवन, जिसके निर्माण पर लाखों रुपये खर्च हुए, वह अपने भव्य स्वरूप के बावजूद आज वीरान पड़ा है। यह भवन 2021-22 में बनकर तैयार हुआ था, लेकिन आज तक ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिला है।

जानकारी के अनुसार, पंचायत सचिव प्रविंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें भवन की वर्तमान स्थिति की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि पूर्व मुखिया से वर्तमान मुखिया ने विधिवत प्रभार नहीं लिया था, जिसके चलते भवन की देखरेख और संचालन ठप पड़ गया। वर्तमान में उनका कार्यालय नावाडीह गांव के सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है।

जब इस भवन की जमीनी हकीकत जानने के लिए पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। भवन का ताला खुला था और अंदर एक परिवार डेरा डाले हुए था। एक कमरे में चारपाई, बिस्तर, चूल्हा-चौका, खाने-पीने का सामान, धान की बोरियां और यहां तक कि बाजा भी रखा मिला। इस परिवार के मुखिया पिंटू ठाकुर ने बताया कि मुखिया जी ने इसे देखरेख के लिए रखा है और वह पिछले चार-पांच महीनों से अपने परिवार के साथ यहीं रह रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि करोड़ों की लागत से बने सरकारी भवनों का किस हद तक दुरुपयोग हो रहा है।

सूत्रों के अनुसार, वर्तमान मुखिया ने पंचायत निधि से नावाडीह गांव के सामुदायिक भवन का पुनर्निर्माण कराकर वहां गतिविधियां संचालित कीं, क्योंकि उनका दावा था कि पंचायत सरकार भवन तक जाने का रास्ता नहीं है। हालांकि, हकीकत यह है कि बरसात को छोड़कर अन्य दिनों में भवन तक पहुंचने में कोई समस्या नहीं है। मुखिया प्रतिनिधि चंद्रशेखर राय उर्फ बबलू राय का कहना है कि भवन उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

सरकार की मंशा थी कि इन पंचायत भवनों के माध्यम से ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, जनसुनवाई, सरकारी योजनाओं की जानकारी और कर्मचारियों की उपस्थिति जैसी आवश्यक सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकें। लेकिन, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद, यह भवन अपने मूल उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं और सरकारी उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण पेश कर रहे हैं। ग्रामीणों को आज भी इन मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें