बदायूं में ‘नल से जल’ योजना: 80% काम पूरा, पर पानी के लिए अभी करना होगा इंतजार
बदायूं शहर में अमृत-2.0 योजना के तहत पेयजल पुनर्गठन का कार्य काफी हद तक पूरा हो चुका है, लेकिन शहरवासियों को ‘नल से जल’ की सुविधा मिलने में अभी और विलंब होगा। योजना का लगभग 80 प्रतिशत काम संपन्न हो चुका है, जिसमें तीनों नए ओवरहेड टैंकों और अधिकांश पाइपलाइनों का निर्माण शामिल है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, शेष कार्य और जल परीक्षण पूरा होने में कम से कम दो महीने का समय और लग सकता है, जिससे यह सुविधा अगले साल की शुरुआत यानी फरवरी या मार्च तक ही शहरवासियों को नसीब हो पाएगी।
योजना के तहत कुल 90 किलोमीटर क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाई जानी है, जिसमें से 85 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है। शहर के उपरपारा क्षेत्र में अंतिम चरण का काम चल रहा है। इसके साथ ही, तीन नए ओवरहेड टैंक, जिनकी क्षमता 2000, 1900 और 1800 किलोलीटर है, बनाए गए हैं। इनमें से दो टैंकों का निर्माण और परीक्षण पूरा हो गया है, जबकि तीसरे टैंक में बिजली फिटिंग संबंधी देरी के कारण जल आपूर्ति परीक्षण अभी बाकी है। इसके अलावा, नौ पुराने पंप हाउसों को रीबोर किया गया है और आठ नए पंप हाउस बनाए गए हैं।
योजना के कार्यान्वयन में एक बड़ी बाधा तब आई जब वाटर वर्क्स कैंपस में बनी लगभग 50 साल पुरानी पानी की टंकी को ध्वस्त किया गया। टंकी गिरने से वहां बनी मुख्य जलापूर्ति लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे जमीन करीब छह फीट धंस गई। इस घटना के कारण शहर की जलापूर्ति में अस्थायी दिक्कतें आ रही हैं। फिलहाल, मलबा हटाने और मुख्य लाइन की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि सभी पाइपलाइन बिछाने का काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद, योजना को तीन महीने के लिए ट्रायल पर रखा जाएगा, जैसा कि अनुबंध में प्रावधान है। इस दौरान पाई जाने वाली किसी भी कमी को तेजी से दूर किया जाएगा। उम्मीद है कि इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद, शहर की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा और हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा सकेगा, जिससे लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
