जीआरपी का सघन अभियान: हिस्ट्रीशीटरों के सत्यापन से अपराध पर लगेगी लगाम
मथुरा। ट्रेनों में होने वाली आपराधिक वारदातों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने हिस्ट्रीशीटरों के सत्यापन का अभियान सघन कर दिया है। इस अभियान के तहत, जीआरपी के सिपाही अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर हिस्ट्रीशीटरों के घरों पर जा रहे हैं और उनके वर्तमान जीवनशैली व गतिविधियों की विस्तृत जानकारी जुटा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधानों, शहरी इलाकों में वार्डों के पार्षदों और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी हिस्ट्रीशीटरों के व्यवहार और वर्तमान स्थिति के संबंध में जानकारी ली जा रही है, ताकि रिकॉर्ड को अद्यतन किया जा सके।
जीआरपी की फाइलों में वर्तमान में कुल 36 हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं। ट्रेनों में लगातार अपराध करने वाले व्यक्तियों की हिस्ट्रीशीट खोली जाती है, जिसके बाद इसे उनके निवास क्षेत्र के स्थानीय थाने को निगरानी के लिए भेज दिया जाता है। जीआरपी नियमित रूप से संबंधित थानों से इन हिस्ट्रीशीटरों की गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करती रहती है।
सत्यापन अभियान के दौरान यह भी पता चला है कि दर्ज 36 हिस्ट्रीशीटरों में से पांच अभी भी फरार चल रहे हैं। इन फरार हिस्ट्रीशीटरों की गिरफ्तारी के लिए उच्चाधिकारियों द्वारा विशेष टीमों का गठन किया गया है।
एक सुखद पहलू यह भी सामने आया है कि 36 में से 26 हिस्ट्रीशीटरों ने सफलतापूर्वक अपराध की दुनिया से नाता तोड़ लिया है। सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि इनमें से कई अब सब्जी का ठेला लगा रहे हैं, चाय-पान की दुकान चला रहे हैं, या फिर मजदूरी करके अपना जीवनयापन कर रहे हैं। इन हिस्ट्रीशीटरों के खिलाफ पिछले कई वर्षों से जीआरपी या किसी अन्य थाने में कोई नया आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है, जिसके कारण उनकी निगरानी में भी शिथिलता बरती गई है।
इसके अतिरिक्त, सत्यापन प्रक्रिया में एक हिस्ट्रीशीटर की मृत्यु का मामला भी सामने आया है। मथुरा के हाइवे थाना क्षेत्र के एक हिस्ट्रीशीटर की मौत हो जाने के बाद, जीआरपी थाने में उसकी हिस्ट्रीशीट को बंद कर दिया गया है और इस संबंध में हाइवे थाना पुलिस को भी सूचित कर दिया गया है।
अभियान के तहत, जीआरपी हिस्ट्रीशीटरों के नवीनतम फोटो भी जुटा रही है, क्योंकि पुराने फोटो अप्रासंगिक हो गए हैं। नए फोटो हिस्ट्रीशीट पर चस्पा किए जा रहे हैं ताकि उनकी वर्तमान पहचान सुनिश्चित की जा सके।
जीआरपी थाना प्रभारी निरीक्षक, जितेन्द्र सिंह यादव (बदला हुआ नाम) के अनुसार, “हम हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन करा रहे हैं और इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। सिपाही हिस्ट्रीशीटरों के घर पहुंचकर उनके बारे में पता लगा रहे हैं। ग्राम प्रधान, सभासद और पार्षद से भी उनके दिनचर्या के बारे में जानकारी ली जा रही है। यह देखकर खुशी हो रही है कि ज्यादातर हिस्ट्रीशीटर अपराध छोड़ कर दूसरे काम कर रहे हैं।”
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