पूर्वांचल के पीएमश्री स्कूलों में बनेंगे हर्बल उद्यान, छात्रों को मिलेगी पर्यावरण की सीख
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में स्थित 207 पीएमश्री कंपोजिट विद्यालयों में अब छात्र प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के गुर सीखेंगे। शासन द्वारा इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत 56.40 लाख रुपये की लागत से विशेष हर्बल और औषधीय उद्यान तैयार किए जाएंगे। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को आयुर्वेद, औषधीय पौधों के महत्व से अवगत कराना और उनमें पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाना है।nnविभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस कुल लागत का 46.66 प्रतिशत हिस्सा भूमि की तैयारी और पौध सामग्री पर खर्च किया जाएगा। वहीं, शेष 53.34 प्रतिशत राशि का उपयोग सिंचाई व्यवस्था, ग्रीन शेड निर्माण और उद्यानों के रखरखाव जैसे कार्यों के लिए किया जाएगा। इन उद्यानों में विभिन्न प्रकार के सुगंधित, औषधीय और अन्य उपयोगी पौधे लगाए जाएंगे, जिनमें अश्वगंधा, तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, नीम, हरड़, आंवला, लेमनग्रास, पुदीना, शतावरी, सिट्रोनेला, गेंदा, हल्दी, अदरक और सहजन जैसे प्रमुख पौधे शामिल हैं।nnइन उद्यानों का महत्व केवल पौधों को उगाना ही नहीं है, बल्कि यह छात्रों को स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण और स्वस्थ जीवनशैली में इन पौधों की भूमिका को समझने का एक व्यावहारिक मंच भी प्रदान करेगा। शिक्षक इन उद्यानों के माध्यम से विज्ञान और पर्यावरण विषय की पाठ्यचर्चा को और अधिक रुचिकर बनाएंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, यह पहल छात्रों को अनुभवात्मक शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करेगी।nnइस योजना के तहत चयनित प्रत्येक विद्यालय को उद्यान की स्थापना के लिए 30 हजार रुपये की राशि प्रबंध समिति के खाते में भेज दी गई है। यह उद्यान विद्यालय परिसर में लगभग 300 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित होगा। पौधों की सुरक्षा और नियंत्रित वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए 20×15 फीट का ग्रीन शेड भी बनाया जाएगा। एक अनूठी पहल के तौर पर, विद्यालय से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग खाद बनाने में किया जाएगा, जिसका प्रयोग इसी उद्यान में होगा।nnइस परियोजना को सफल बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग, कृषि, आयुष और उद्यान विभाग के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करेगा। विकसित उद्यानों की प्रगति रिपोर्ट और फोटोग्राफ प्रधानाध्यापक प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करेंगे। महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) द्वारा इस संबंध में सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।nnजिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुसार, खंड शिक्षा अधिकारियों को इन उद्यानों को तैयार कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पर्यावरण क्लब और बाल संसद के माध्यम से उद्यानों की नियमित देखभाल भी कराई जाएगी, जिससे छात्रों में जिम्मेदारी की भावना का विकास होगा। यह परियोजना पूर्वांचल के छात्रों के लिए प्रकृति के करीब आने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने का एक बेहतरीन अवसर साबित होगी।”
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