अलीगढ़ की 4 लापता बच्चियां वृंदावन से सकुशल बरामद, 110 कैमरों और मोबाइल ट्रेसिंग से मिली सफलता
अलीगढ़ के अतरौली थाना क्षेत्र से लापता हुई चार नाबालिग बालिकाओं को पुलिस ने 15 घंटे के अंदर मथुरा जिले के वृंदावन से सकुशल बरामद कर लिया। परिजनों की डांट-फटकार से क्षुब्ध होकर चारों घर छोड़कर गई थीं। घूमने के इरादे से साथ में रुपये व जेवर भी ले गईं। पहले दिल्ली, फिर मथुरा पहुंचीं। एसपी देहात के नेतृत्व में लगीं 10 टीमों ने सीसीटीवी व तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उन्हें तलाश लिया। एसएसपी नीरज जादौन ने रविवार को प्रेसवार्ता करके बरामदगी का खुलासा किया। साथ ही पुलिस टीम की पीठ थपथपाते हुए 25 हजार रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की।
पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांच
शनिवार दोपहर करीब एक बजे चारों बालिकाएं घर से बिना बताए चली गई थीं। देर शाम नहीं लौटीं तो रात करीब आठ बजे पुलिस को सूचना दी गई। तत्काल अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। ऑपरेशन स्माइल के तहत बालिकाओं की तलाश के लिए एसपी देहात मनीष कुमार मिश्र व सीओ अतरौली अभिषेक पटेल के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया। टीमों ने पीड़ित परिवार, लड़कियों के सहपाठियों, शिक्षकों व ग्रामीणों से वार्ता कीं। डॉग स्क्वाइड टीम ने गांव में सघनता से तलाश की। थाना टीम, सर्विलांस, क्रिमिनल इंटेलीजेंस विंग देहात द्वारा सभी संदिग्ध नंबरों और सोशल मीडिया वेबसाइट का टेक्निकल विश्लेषण किया गया।
मोबाइल ट्रेसिंग से मिला सुराग
इसी बीच पता चला कि लड़कियों के पास एक मोबाइल फोन भी है। उसी को ट्रेस करते हुए पुलिस उन तक पहुंची। लोकेशन के आधार पर रविवार सुबह चार बजे चारों को वृंदावन से बरामद कर लिया गया। उन्होंने पुलिस को बताया कि माता-पिता डांटते थे। इसलिए खुद ही दिल्ली की सरोजिनी नगर मार्केट में शॉपिंग करने गई थीं। वहां से वृंदावन चली गईं। कोई अपहरण कर नहीं ले गया था।
व्यापक तलाशी अभियान
पुलिस ने अलीगढ़, दिल्ली, मथुरा-वृंदावन के करीब 150 किलोमीटर के दायरे में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर समेत 110 से अधिक कैमरे खंगाले। इसमें हरदुआगंज बॉर्डर से लेकर दिल्ली व मथुरा के सभी टोल प्लाजा व प्रमुख स्थान शामिल थे। इस काम में पांच थाना प्रभारी व देहात की पूरी टीम जुटी रही। रातभर कोई पुलिसकर्मी सोया तक नहीं। अधिकारी भी पल-पल की अपडेट लेते रहे। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, टैक्सी स्टैंड के कैमरों में भी लड़कियों की तलाश की गई। होटल, सराय, मेला आदि में भौतिक रूप से तलाश की गई।
बच्चों की काउंसलिंग और भविष्य की योजना
इस घटना के बाद एसएसपी ने बालिकाओं की काउंसिलिंग करवाई तो पता चला कि उनकी घूमने की इच्छा है। वह वृंदावन के दर्शन करना चाहती हैं। इस पर एसएसपी ने वादा किया कि पुलिस समय निकालकर जल्द ही उनको वृंदावन लेकर जाएगी। साथ ही उन्हें चॉकलेट व किताबें भी उपलब्ध कराईं। उधर, बच्चों के माता-पिता की भी काउंसिलिंग की गई। एसएसपी ने उनसे कहा कि बच्चों पर नजर रखें। उन्हें डांटने की बजाय सही रास्ता दिखाएं।
एक और बच्ची का भी था भागने का इरादा
मामला नाबालिग बच्चियों से जुड़ा था तो पुलिस के भी हाथ-पांव फूल गए। बिना देरी किए पुलिस ने तलाश शुरू कर दी। इसमें एक पांचवीं लड़की भी शामिल थी, जो भागने वाली थी। वह पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। उसी के माध्यम से पुलिस को चारों का सुराग मिला। दरअसल, पुलिस को ये नहीं पता था कि एक बच्ची के पास फोन भी है। पुलिस ने बच्ची की सहेलियों से पूछताछ की। इसमें एक लड़की संदिग्ध नजर आई। लेकिन, वह भी पुलिस के सामने कुछ नहीं बोली। पुलिस को भरोसा था कि बच्चियां किसी न किसी से संपर्क जरूर करेंगी। इसीलिए उस लड़की समेत कई अन्य लोगों के फोन सर्विलांस पर लगाए।
संपर्क में थी पांचवीं सहेली
इसी बीच उस लड़की के पास बालिकाओं का फोन आया। वह चारों उसके संपर्क में थी। लेकिन, कॉल रिकॉर्ड में उसका नंबर डिलीट करा दिया। इसी से पुलिस को दिशा मिली और बालिकाओं की लोकेशन मिल गई। बाद में पूछताछ में उस लड़की ने बताया कि वह भी चारों के साथ भागने वाली थी। लेकिन, उस समय वह गांव में नहीं थी तो जा नहीं पाई।
स्मार्टफोन की चाहत और घर से भागना
एसएसपी ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि अक्टूबर 2025 में एक सब-इंस्पेक्टर का बेटा भी इसी तरह घर छोड़कर चला गया था। वह छह माह दिल्ली में रहा। इसके बाद लौटकर आया। वजह थी कि परिजनों ने उसे स्मार्टफोन देने से मना कर दिया था। बाद में उसकी भी काउंसिलिंग कराई गई। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और अभिभावकों के साथ संवाद की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।
