यूपी वोटर लिस्ट से 3 करोड़ नाम गायब: जानें क्यों और कब तक कर सकते हैं आपत्ति
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नामों के हटने से हड़कंप मच गया है। एसआईआर (Systematic Voter’s Education and Electoral Participation) प्रक्रिया के बाद जारी हुई ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 3 करोड़ वोटरों के नाम काट दिए गए हैं। यह संख्या बिहार की ड्राफ्ट सूची से भी अधिक है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद अब ड्राफ्ट सूची में 12.55 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
नाम कटने के कारण और संख्या
जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उनमें 46.23 लाख मृत पाए गए, 2.17 करोड़ मतदाता स्थानांतरित हो गए हैं, जबकि 25.47 लाख डुप्लीकेट और 79.52 लाख अन्य श्रेणियों में शामिल हैं। यह छंटनी घर-घर जाकर की गई गिनती के अभियान का परिणाम है। मूल रूप से यह अभियान 11 दिसंबर को समाप्त होना था, लेकिन बड़ी संख्या में नामों के बाहर होने पर राज्य ने 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था। कुल मिलाकर, ड्राफ्ट सूची में लगभग 18.70 फीसदी वोटरों के नाम हटाए गए हैं।
आपत्ति और निस्तारण की प्रक्रिया
सभी जिलों में ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। मतदाताओं को सूची पर अपनी दावे या आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 6 फरवरी तक का समय दिया गया है। इसके बाद, 6 फरवरी से 27 फरवरी तक इन आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 6 मार्च को किया जाएगा।
प्रमुख जिलों में छंटनी का आंकड़ा
सबसे अधिक 12 लाख मतदाताओं के नाम लखनऊ से काटे गए हैं। इसके बाद प्रयागराज (11.56 लाख), कानपुर नगर (9 लाख), आगरा (8.36 लाख), गाजियाबाद (8.18 लाख), बरेली (7.14 लाख), मेरठ (6.65 लाख), गोरखपुर (6.45 लाख), सीतापुर (6.23 लाख) और जौनपुर (5.89 लाख) में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।
नए मतदाता और सुधार के लिए निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नए मतदाता बनने के लिए फॉर्म 6 भरने, सुधार या स्थानांतरण के लिए फॉर्म 8 भरने और मृत या स्थानांतरित हो चुके सदस्यों के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 भरने का निर्देश दिया है। नए मतदाता बनने के लिए अब तक 15.78 लाख फॉर्म भरे जा चुके हैं। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि मतदाता सूची अद्यतन और सटीक रहे, जिससे आगामी चुनावों में पारदर्शिता बनी रहे।
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