बैंकिंग संकट और विदेशी अधिग्रहण पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने: एनपीए आंकड़ों से पलटवार
विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय बैंकों के अधिग्रहण पर कांग्रेस के आरोपों का भाजपा ने कड़ा जवाब दिया है। भाजपा ने यूपीए सरकार पर देश को सबसे खराब बैंकिंग संकट में धकेलने का आरोप लगाया और एनपीए के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने बैंकों को मजबूत किया है। भाजपा ने जोर दिया कि भारतीय बैंक अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और लाभदायक स्थिति में हैं, जो वैश्विक विश्वास का संकेत है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने देश में विदेशी कंपनियों द्वारा बैंकों के अधिग्रहण को लेकर कांग्रेस के आरोपों का पुरजोर खंडन किया है। भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में सबसे खराब बैंकिंग संकट का दौर कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में देखा गया था, और ऐसी पार्टी किसी को भी बैंकिंग प्रणाली पर उपदेश देने की स्थिति में नहीं है।
कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने हाल ही में विदेशी इकाइयों को भारतीय बैंकों का अधिग्रहण करने की अनुमति देने को अविवेकपूर्ण बताया था, जिससे संभावित जोखिम बढ़ने की आशंका जताई गई थी। उन्होंने लक्ष्मी विलास बैंक (सिंगापुर के डीबीएस समूह द्वारा), कैथोलिक सीरियन बैंक (कनाडा के फेयरफैक्स द्वारा), यस बैंक (जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन द्वारा), और आरबीएल बैंक (दुबई की एमिरेट्स एनबीडी द्वारा) जैसे अधिग्रहणों का उल्लेख किया। रमेश ने 1969 में विदेशी बैंकों के राष्ट्रीयकरण पर जनसंघ की आलोचना को भी याद दिलाया था।
भाजपा के आइटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने रमेश की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ही भारत की बैंकिंग प्रणाली के पतन की पटकथा लिखी थी। उन्होंने कहा कि संप्रग शासन के दौरान भारतीय बैंक ‘राजनीतिक खिलौने’ बन गए थे, जिसके परिणामस्वरूप बैड लोन में अत्यधिक वृद्धि हुई और बड़े पैमाने पर घोटाले सामने आए। मालवीय ने कांग्रेस पर व्यवस्था में ‘सड़न’ पैदा करने का आरोप लगाया।
आंकड़ों का हवाला देते हुए, मालवीय ने बताया कि 2014-15 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) 2.15 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर मात्र 0.73 लाख करोड़ रुपये रह गया है। उन्होंने दावा किया कि यह सुधार भाजपा सरकार द्वारा बैंकों को मजबूत करने और वित्तीय स्थिरता लाने के लिए उठाए गए ठोस कदमों का परिणाम है।
मालवीय ने जोर देकर कहा कि आज भारतीय बैंक मजबूत और लाभदायक स्थिति में हैं, जो कांग्रेस द्वारा छोड़ी गई अव्यवस्था के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के निवेश और संचालन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की सख्त निगरानी में हैं, जो भारत की बैंकिंग प्रणाली में वैश्विक विश्वास का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
Source: Jagran
