यूपी बोर्ड परीक्षा: केंद्रों की संख्या घट सकती है, निगरानी होगी आसान
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) आगामी बोर्ड परीक्षाओं के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बोर्ड आगामी परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या में कमी करने की योजना बना रहा है। इस पहल का प्राथमिक उद्देश्य परीक्षाओं के दौरान नकल जैसी अनैतिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना और परीक्षा केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।
इस योजना के तहत, बड़े परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। पहले जहां एक बड़े परीक्षा केंद्र पर अधिकतम 1800 परीक्षार्थियों के बैठने की व्यवस्था थी, वहीं अब इस क्षमता को बढ़ाकर 2200 तक किया जा सकता है। इस बदलाव से कुल परीक्षा केंद्रों की संख्या को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा और निगरानी टीमें अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगी।
जिले में परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विभिन्न तहसीलों से परीक्षा केंद्रों के लिए माध्यमिक विद्यालयों की सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उनका विवरण बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, उप-जिलाधिकारियों द्वारा विद्यालयों की व्यवस्थाओं का सत्यापन कर रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को भेजी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि कितने परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।
पिछली बार जिले में बोर्ड परीक्षा के लिए 146 केंद्र बनाए गए थे। इस बार, परीक्षार्थियों की संख्या में वृद्धि और बड़े केंद्रों पर अधिक परीक्षार्थियों के आवंटन के निर्णय के कारण, केंद्रों की संख्या में कमी आने की संभावना है। इस वर्ष लगभग 91 हजार छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकृत हुए हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक के अनुसार, सभी तहसीलों से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उन्हें बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है। अंतिम रूप से परीक्षा केंद्रों की संख्या का निर्धारण बोर्ड द्वारा किया जाएगा। बड़े परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों की संख्या में की गई वृद्धि का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम परीक्षा केंद्रों के माध्यम से भी प्रभावी निगरानी की जा सके और परीक्षा प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराया जा सके। यह कदम परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।
