उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर का खर्च उपभोक्ताओं पर? 4000 करोड़ के प्रस्ताव से बढ़ेगी UP electricity news की चिंता
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर एक नया आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना है। राज्य पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की लागत बिजली दरों में शामिल कर उपभोक्ताओं से वसूलने का प्रस्ताव नियामक आयोग में दाखिल किया है। इस कदम से UP electricity news में उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो अगले वित्तीय वर्ष से बिजली दरें बढ़ सकती हैं।
पावर कॉरपोरेशन ने वर्ष 2026-27 के लिए अपनी वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव में मीटरों के लिए 3800 से 4000 करोड़ रुपये जोड़ने का सुझाव दिया है। यह आकलन मार्च 2026 तक लगने वाले स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की संख्या के आधार पर किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एआरआर में ही 1109 करोड़ रुपये जुड़ जाएंगे, क्योंकि वहां 39.29 लाख मीटर लगने का अनुमान है। ओपेक्स (ऑपरेशनल एक्सपेंडीचर) मॉडल के तहत प्रति स्मार्ट प्रीपेड मीटर 114.57 रुपये मासिक शुल्क लेने की बात कही गई है।
उपभोक्ता परिषद का कड़ा विरोध
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन के इस प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया है। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं वसूला जाएगा, ऐसे में एआरआर में इसकी लागत शामिल करना अनुचित है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 10 सितंबर से अब तक लगभग 3,33,000 उपभोक्ताओं से प्रति मीटर 6016 रुपये की गलत वसूली क्यों की गई है। परिषद का तर्क है कि यदि भविष्य में बिजली दरों में मीटर की लागत जोड़ी जाती है, तो यह उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक भार होगा।
बिजली चोरी पर लगाम नहीं
एक ओर जहां स्मार्ट मीटर की लागत को लेकर बहस जारी है, वहीं दूसरी ओर बिजली चोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पोस्टपेड से प्रीपेड डिजिटल मीटर लगने के बावजूद, घनी आबादी और वीआईपी कॉलोनियों तक में मीटर बाईपास कर बिजली चोरी की जा रही है। अंडरग्राउंड बिजली लाइनों और खुले/टूटे बॉक्स का फायदा उठाकर सीधे कनेक्शन लिए जा रहे हैं, जिससे निगम को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। बिजली विभाग के अधिकारी और विजिलेंस टीम इस समस्या के प्रति गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
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