जेन जी के बीच महंगे स्नीकर्स का फर्स्ट-कॉपी ट्रेंड क्यों बढ़ा रहा है चिंता | lifestyle news
आज के दौर में कॉलेज जाने वाले युवाओं और शुरुआती सैलरी पर काम करने वाले प्रोफेशनल्स के बीच महंगे स्नीकर्स का क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है। मेट्रो या कॉलेज परिसर में लाखों रुपये कीमत वाले जूते पहने युवा आम नजर आने लगे हैं, जबकि उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति इसके उलट होती है। इस विरोधाभास ने देश के टियर-1 और टियर-2 शहरों में फर्स्ट-कॉपी और नकली जूतों के एक बड़े बाजार को जन्म दिया है।
फैशन और सोशल मीडिया का प्रभाव
सोशल मीडिया पर रील्स बनाने और खुद को अपडेट दिखाने की होड़ ने युवाओं की जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। हिप-हॉप संस्कृति और सेलिब्रिटी के स्ट्रीटवियर लुक्स का अनुसरण करते हुए आज का युवा महंगे जूतों को अपनी पहचान और स्टेटस का प्रतीक मानता है। ओरिजिनल लिमिटेड एडिशन जूतों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिन्हें आम आमदनी वाला युवा खरीद पाने में असमर्थ है।
बिक्री और बाजार का दायरा
दिल्ली के सरोजिनी नगर, मजनू का टीला से लेकर मुंबई के बाजारों और इंस्टाग्राम के गुप्त पेजों पर अस्सी हजार रुपये तक के जूते मात्र पंद्रह सौ से तीन हजार रुपये में आसानी से मिल जाते हैं। दिखने में ये फर्स्ट-कॉपी या सेवन-ए क्वालिटी के जूते बिल्कुल असली जैसे प्रतीत होते हैं। युवाओं का तर्क है कि जब कम दाम में वही स्टाइल मिल रहा है, तो अधिक पैसे खर्च करना समझदारी नहीं है। इस प्रवृत्ति से पारंपरिक फैशन उद्योग के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।
