Anesthesia से पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री समझना क्यों जरूरी? विशेषज्ञों ने बताई वजह
एनेस्थेसियोलॉजिस्ट का काम सिर्फ मरीज को बेहोश करना नहीं है, बल्कि मरीज के प्राणों की सुरक्षा भी काफी हद तक उन्हीं पर निर्भर करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सर्जरी से पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है। इसमें मरीज के अंगों की कार्यक्षमता, शुगर, ब्लड प्रेशर और किसी भी तरह की एलर्जी की जानकारी शामिल है। यह सलाह डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के पूर्व डायरेक्टर डॉ. दीपक मालवीय ने दी।
भारतीय सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की ओर से जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित सीएमई (Continuing Medical Education) में डॉ. मालवीय ने कहा कि 2030 तक एनेस्थीसिया से होने वाली मौतों के आंकड़े को शून्य करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि 1981 में यह आंकड़ा 10 हजार में तीन मौतें था, जो अब घटकर दो लाख में दो मौतों पर आ गया है। इस सीएमई में 150 विशेषज्ञों ने भाग लिया।
जनरल एनेस्थीसिया बनाम क्षेत्रीय एनेस्थीसिया
सीएमई में विशेषज्ञों ने जनरल एनेस्थीसिया के साथ-साथ क्षेत्रीय एनेस्थीसिया (Regional Anesthesia) पर भी चर्चा की। क्षेत्रीय एनेस्थीसिया में सिर्फ सर्जरी वाले अंग को सुन्न किया जाता है, जिससे मरीज होश में रहता है और डॉक्टर से संवाद कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने इसे चुनौतीपूर्ण बताया। पूर्व निदेशक ने कहा कि अगर सर्जरी के दौरान मरीज का खून अधिक बहने लगे या जटिलता बढ़ जाए, तो मरीज को संभालना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में 30 फीसदी मामलों में क्षेत्रीय एनेस्थीसिया का उपयोग हो रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में 70 फीसदी सर्जरी जनरल एनेस्थीसिया से की जा रही हैं।
AI को मददगार समझें, मालिक नहीं
विशेषज्ञों ने एआई (Artificial Intelligence) के इस्तेमाल पर भी जोर दिया, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि एआई से बेहतर परिणाम मिल रहे हैं, लेकिन युवाओं को इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतनी होगी। एआई को केवल एक मददगार के रूप में देखना चाहिए, न कि मालिक के रूप में। अगर पूरी तरह से इस पर निर्भर हो जाएंगे, तो यह आपकी समझ को कुंद कर देगा।
हार्ट बीट के आधार पर डोज का निर्धारण
एसजीपीजीआई के पूर्व एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. एसपी अंबरेश ने बताया कि अब हार्ट की हर बीट की मॉनिटरिंग करके एनेस्थीसिया की डोज तय की जा रही है। इलेक्ट्रिक पंप से दी गई डोज सर्जरी के दौरान समय बढ़ने पर मरीज की बेहोशी के समय को बढ़ा देती है।
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