0

वाराणसी में भ्रष्टाचार का ‘गड्ढा’: धंसती सड़कें बनीं जानलेवा खतरा

By Nov 7, 2025

वाराणसी शहर इन दिनों भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों से उपजी एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है। जहां एक ओर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की धंसती सड़कें राहगीरों के लिए जानलेवा खतरा बन गई हैं। हाल ही में एक दिन पूर्व शिवपुर बाजार में सड़क धंसने का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार सुबह कज्जाकपुरा से कोनिया जाने वाले मार्ग पर देर रात एक और सड़क धंस गई, जिससे शहरवासी सकते में आ गए और आवागमन बाधित हो गया।

इस समस्या की जड़ 13 साल पुरानी एक परियोजना में है। वर्ष 2009-10 में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत एलएंडटी कंपनी को शहर में सीवर, ड्रेनेज और पेयजल पाइपलाइन डालने का काम सौंपा गया था। हालांकि, एलएंडटी ने खुद काम करने के बजाय इसे छोटे-छोटे ठेकेदारों को पेटी पर दे दिया। इन ठेकेदारों ने अपने हिस्से का काम तो किया, लेकिन पाइपलाइनों को सही तरीके से जोड़ा नहीं गया। जल निगम के अभियंताओं ने उस दौरान मौके पर निगरानी का अभाव रखा, जिसका नतीजा आज शहर की धंसती सड़कों के रूप में सामने है।

इन पाइपलाइनों में सीपेज और लीकेज के कारण आए दिन सड़कें धंस जाती हैं। अधिकारी अक्सर आरोप-प्रत्यारोप में उलझते हैं और अपनी कमी छिपाने के लिए गड्ढों को मलबे से भरकर इतिश्री कर लेते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सीपेज के कारण सड़क फिर धंस जाती है। यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आए दिन धंस रही सड़कें खुद इस हकीकत को बयां कर रही हैं। बुधवार को शिवपुर बाजार के दुर्गा मंदिर के पास धंसी सड़क पर लोक निर्माण विभाग ने गिट्टी भरकर अपना काम पूरा कर लिया, लेकिन जलकल विभाग के अभियंता उसे स्थायी रूप से दुरुस्त करने नहीं पहुंचे।

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने स्वीकार किया कि सीपेज और लीकेज के चलते ही सड़कें धंसती हैं। उन्होंने बताया कि इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है और किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए गड्ढों में मलबा भरा गया है। वहीं, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने जलकल और लोक निर्माण विभाग को तत्काल समस्या दूर करने और लीकेज का स्थायी समाधान करने के निर्देश दिए हैं, ताकि राहगीरों को कोई परेशानी न हो।

इस भ्रष्टाचार और लापरवाही की जांच भी हुई है। गुणवत्ता पर सवाल उठने और शिकायतें मिलने के बाद पिछले वर्षों में जांच एजेंसियों ने लापरवाही उजागर की और भ्रष्टाचार के आरोप में 17 अभियंता निलंबित हुए। नगर निगम ने एलएंडटी कंपनी की लापरवाही को देखते हुए उसके 24 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान भी रोक दिया है। हालांकि, कार्यदायी संस्था कई बार इस राशि की मांग कर चुकी है, लेकिन जलकल विभाग ने बजट नहीं होने का हवाला देते हुए भुगतान से इनकार कर दिया है। शहर के विकास के नाम पर हुए इस घोटाले का खामियाजा आज भी आम जनता अपनी जान जोखिम में डालकर भुगत रही है। स्थायी समाधान के बिना, वाराणसी की सड़कें राहगीरों के लिए ‘राहजनी’ का पर्याय बनी रहेंगी।

About Amit Sagar

Journalist covering latest updates.

साझा करें