अवैध मतांतरण गिरोह के सरगना सहित चार की जमानत खारिज, जेल में ही रहेंगे
आगरा की एक अदालत ने अवैध मतांतरण गिरोह के सरगना अब्दुल रहमान और उसके दो बेटों सहित चार प्रमुख आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले से गिरोह के सरगना और उसके साथियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में अब तक कुल 14 आरोपितों के खिलाफ विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, अब्दुल रहमान और उसके गिरोह पर आरोप है कि उन्होंने सदर क्षेत्र की दो सगी बहनों को बहला-फुसलाकर और धोखा देकर उनका धर्म परिवर्तन कराया था। इस गंभीर मामले का खुलासा तब हुआ जब परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सक्रियता दिखाई। इसी वर्ष 24 मार्च को रहस्यमय तरीके से गायब हुई दोनों बहनों को पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद 18 जुलाई को पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर के एक मुस्लिम बाहुल्य इलाके, तपसिया क्षेत्र से सकुशल बरामद किया था।
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के सदस्यों के खिलाफ अभियान चलाया और कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में गिरोह का सरगना अब्दुल रहमान उर्फ महेंद्र पाल सिंह भी शामिल है, जो मूल रूप से दिल्ली के मुस्तफाबाद का रहने वाला बताया जाता है। पुलिस ने सभी 14 आरोपितों के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर अदालत में चार्जशीट पेश कर दी है, जिसमें मामले की गंभीरता को रेखांकित किया गया है।
जमानत के लिए अब्दुल रहमान, उसके दोनों बेटे अब्दुल रहीम और अब्दुल्ला, तथा मोहम्मद रहमान कुरैशी ने सत्र न्यायाधीश के समक्ष जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। विस्तृत सुनवाई के बाद, अदालत ने सभी चारों आरोपितों की जमानत अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा। इससे पहले भी गिरोह के अन्य आरोपितों ने जमानत के लिए आवेदन किया था, लेकिन अदालत ने उन सभी की अर्जियों को भी खारिज कर दिया था।
यह मामला देशभर में संचालित हो रहे अवैध मतांतरण गिरोहों की कार्यप्रणाली पर भी प्रकाश डालता है। पुलिस और जांच एजेंसियां ऐसे गिरोहों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं। हाल ही में, देवरिया में एक अन्य मतांतरण मामले में एस.एस. मॉल के मालिक उस्मान गनी के भाई इसराफिल की गिरफ्तारी ने भी इस तरह के मामलों की नई कड़ियां उजागर की हैं। वहीं, छांगुर गिरोह की बेनामी संपत्तियों की जांच में एटीएस और ईडी जैसी एजेंसियां लगी हुई हैं, हालांकि अभी तक कोई खास सुराग हाथ नहीं लगा है।
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