अवैध खनन रिपोर्ट में देरी पर सोनभद्र DM पर लगा 10 हजार का जुर्माना
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अवैध खनन के संबंध में समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत न करने पर सोनभद्र के जिलाधिकारी बीएन सिंह पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जिलाधिकारी को यह रिपोर्ट 23 जून तक जमा करनी थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा के बाद भी रिपोर्ट प्राप्त न होने पर एनजीटी पीठ ने 13 नवंबर को यह जुर्माना तय किया।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने इस मामले में गठित संयुक्त समिति की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया। यह समिति अप्रैल में गठित की गई थी, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट को नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया था। इसके साथ ही पर्यावरण मंत्रालय के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के प्रतिनिधि भी इस समिति का हिस्सा थे।
समिति को घटनास्थल का दौरा कर अवैध खनन की सीमा का पता लगाने और मध्यधारा खनन के आरोपों की सत्यता की पुष्टि करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, समिति को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियों की स्थिति का पता लगाकर 23 जून तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी।
निर्धारित समय सीमा के बाद भी रिपोर्ट प्राप्त न होने पर, पीठ ने रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तिथि चार सप्ताह के लिए बढ़ा दी थी। इसके अतिरिक्त, 30 जून को दो महीने से अधिक की देरी के बाद संयुक्त निरीक्षण के संबंध में जिला मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
न्यायाधिकरण ने जिला मजिस्ट्रेट के अधिवक्ता द्वारा 13 नवंबर की सुबह रिपोर्ट प्रस्तुत करने संबंधी दिए गए तर्कों पर संज्ञान लिया, लेकिन जिलाधिकारी द्वारा बार-बार आदेश का पालन न करने को एक गंभीर मामला माना। इसी कारण डीएम पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस जुर्माने की राशि को एक सप्ताह के भीतर एनजीटी बार एसोसिएशन के पास जमा करने का आदेश दिया गया है।
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब हाल ही में बिल्ली मारकुंडी खदान हादसे के बाद अवैध खनन को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कापासारा में अवैध कोयला खनन के दौरान हुए एक हादसे में चाल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और चार अन्य घायल हो गए थे। इस घटना ने सोनभद्र में अवैध खनन की गतिविधियों और संबंधित सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
