UP healthcare news: SGPGI को एम्स जैसा बनाने की तैयारी, विनोद पॉल की अध्यक्षता में समिति गठित
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) को क्वार्टनरी केयर का अति विशिष्ट अस्पताल बनाने की कवायद शुरू कर दी है। यह पहल राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को राष्ट्रीय मानकों से ऊपर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद पॉल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
समिति का मुख्य उद्देश्य एसजीपीजीआई को देश के पहले राज्य-स्तरीय क्वार्टनरी केयर सेंटर के रूप में विकसित करना है। वर्तमान में प्रदेश के अस्पतालों में प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शरी केयर की सुविधा ही उपलब्ध है। इस अपग्रेडेशन के बाद, एसजीपीजीआई में जीनोम सीक्वेंसिंग, रोबोटिक सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट की क्षमताओं को विश्वस्तरीय मानकों तक ले जाया जाएगा।
इस योजना के तहत, संस्थान में एक विशेष ‘प्रिसिजन मेडिसिन’ यूनिट स्थापित की जाएगी। यह यूनिट केवल लक्षणों के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना (Genetic makeup) के आधार पर दवाइयां और उपचार तय करेगी। इसके अलावा, एआई युक्त डायग्नोस्टिक सर्विस भी शुरू की जाएगी, जो निकट भविष्य में होने वाली बीमारियों का भी पता लगाने में सक्षम होगी।
परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ‘डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम’ होगा। इसके तहत, मरीज का डेटा पूरी तरह क्लाउड-बेस्ड होगा। प्रदेश के दूर-दराज के जिलों के डॉक्टर पीजीआई के विशेषज्ञों के साथ लाइव सर्जिकल परामर्श कर सकेंगे। ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के जरिए प्रदेश के अन्य अस्पताल भी पीजीआई से जुड़ेंगे, जिससे टेली आईसीयू सुविधा के माध्यम से गंभीर मरीजों को विशेषज्ञों का इलाज मिल सकेगा।
इस समिति में मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, चिकित्सा शिक्षा विभाग की विशेष सचिव कृतिका शर्मा और एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमान भी शामिल हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के लिए आगामी बजट में भी प्रावधान किए जाने की संभावना है। यह पहल न केवल रेफरल सिस्टम के बढ़ते दबाव को कम करेगी, बल्कि यूपी को ‘मेडिकल टूरिज्म’ के एक प्रमुख केंद्र के केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगी।
