लखनऊ आउटर रिंग रोड पर 261 कैमरों से होगी ट्रैफिक की निगरानी, अब ‘सेफ ड्राइव’ का नया दौर
लखनऊ का 104 किलोमीटर लंबा आउटर रिंग रोड अब पूरी तरह से ट्रैफिक कैमरों की निगरानी में रहेगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस पूरे रूट को एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) से लैस कर दिया है, जिसमें कुल 261 कैमरे लगाए गए हैं। माती फ्लाईओवर के पास एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जहां से ट्रैफिक की लगातार निगरानी की जाएगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को बढ़ाना है।
ओवर स्पीडिंग पर लगेगी लगाम
आउटर रिंग रोड पर छोटे वाहनों के लिए अधिकतम 100 किमी प्रति घंटा और बड़े वाहनों के लिए 80 किमी प्रति घंटा की गति सीमा तय की गई है। यदि कोई वाहन निर्धारित गति से तेज चलता पाया जाता है, तो पहले उसे डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से चेतावनी दी जाएगी। इसके बावजूद यदि चालक सुधरता नहीं है, तो ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे वाहन की तस्वीर लेकर कंट्रोल रूम को भेजेंगे। कंट्रोल रूम से यह जानकारी ट्रैफिक पुलिस के इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को भेजी जाएगी, जिसके बाद चालान जनरेट होगा। यह प्रणाली सड़क पर हादसों और जाम की स्थिति को भी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगी, जिससे त्वरित कार्रवाई की जा सके।
यात्रियों को मिलेगी तत्काल सहायता
इस सिस्टम के तहत व्हीकल इमिडिएट डिटेक्शन एंड एनफोर्समेंट सिस्टम (VEDIS), वैरिएबल मैसेज साइन बोर्ड (VMSB) और व्हीकल एक्चुएटेड स्पीड डिस्प्ले (VASD) जैसे उपकरण लगाए गए हैं। ये सभी ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से कंट्रोल रूम से जुड़े हैं। 14 वैरिएबल मैसेज साइन बोर्ड (VMSB) यात्रियों को ट्रैफिक की स्थिति, जाम या किसी दुर्घटना की सूचना तुरंत देंगे। कुल 160 ट्रैफिक मॉनिटरिंग कैमरे, 57 ANPR कैमरे, 22 ओवरव्यू कैमरे और 22 ऑटो ट्रैफिक काउंटर कैमरे मार्ग की निगरानी करेंगे और वाहनों की गणना करेंगे। NHAI के अधिकारियों के अनुसार, अगस्त से यह पूरा सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। आपात स्थिति के लिए चार एंबुलेंस और चार क्विक रिस्पांस टीम (QRT) भी तैनात रहेंगी, जो जरूरतमंदों तक तुरंत मदद पहुंचाएंगी।
