लखनऊ में हिट एंड रन के 345 मामले: पुलिस की धीमी जांच, सीसीटीवी से होगी पहचान
लखनऊ की सड़कों पर बेलगाम वाहन चालकों का आतंक बढ़ता जा रहा है। तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाए जा रहे वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है या वे अपाहिज हो रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती ऐसे वाहन चालकों की पहचान करना है जो दुर्घटना के बाद मौके से फरार हो जाते हैं। पिछले डेढ़ वर्षों में राजधानी में ऐसे 345 मामले दर्ज किए गए हैं।
मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यह खुलासा हुआ कि कई मामले अभी भी लंबित हैं। एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी 96 मामले अनसुलझे हैं, जबकि इस साल दर्ज 124 मामलों में से 73 पीड़ितों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। वर्ष 2025 में 221 ऐसे मामले दर्ज हुए थे, जिनमें से 96 अभी भी लंबित हैं। वहीं, जनवरी से जून 2026 तक 124 मामलों में से 51 लंबित पाए गए। लखनऊ-हरदोई हाईवे पर ऐसे सबसे अधिक 98 मामले सामने आए हैं।
हिट एंड रन मुआवजा योजना के तहत, मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये और घायल होने पर 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है। इसके लिए एफआईआर दर्ज कराने के बाद एसडीएम कार्यालय में आवेदन करना होता है।
रात के अंधेरे में दुर्घटना कर भागने वाले चालकों की पहचान एक बड़ी चुनौती है। इस समस्या से निपटने के लिए मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने ट्रैफिक पुलिस को हाई-स्पीड सीसीटीवी कैमरों का उपयोग करके ऐसे वाहन चालकों की पहचान करने का निर्देश दिया है। इससे पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद है।
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