कासगंज के 60 ऐतिहासिक स्थलों की बनेगी पर्यटन बुकलेट, UP Tourism को मिलेगा बढ़ावा
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के प्राचीन, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लगभग 60 स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता दिलाने के उद्देश्य से इनका विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया है। इस पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटकों को इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत से परिचित होने का अवसर मिलेगा, जिससे UP Tourism का दायरा भी बढ़ेगा।
लखनऊ से आई पर्यटन विभाग की एक विशेष टीम ने इन सभी प्रमुख स्थलों की गहन फोटोग्राफी और ड्रोन के माध्यम से वीडियोग्राफी की है। इस डिजिटल रिकॉर्डिंग के आधार पर जल्द ही एक आकर्षक पर्यटन बुकलेट तैयार की जाएगी, जिसमें इन सभी धरोहरों को समाहित किया जाएगा।
कासगंज क्षेत्र में नदरई एक्वाडक्ट, भीमसेन का घंटा, कालिंजर महादेव, गार्डनर का मकबरा, जखेड़ा पुरातात्विक स्थल, चामुंडा मंदिर, पारना मठ, किला शंकरगढ़, गंगावन और भगीरथवन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को कवर किया गया। सोरों जी में हरिपदी गंगा, वराह मंदिर, सूर्यकुंड, चंद्र कुटी, सीताराम मंदिर, बटुक भैरवनाथ मंदिर, श्रीयंत्र, गृद्धवट, जया पीठ, बाछरू स्थल, सीता रसोई, भागीरथ व कपिल मुनि की गुफा, करुआ देवता और मेहता पुस्तकालय के मनोहारी दृश्य भी ड्रोन कैमरों में कैद किए गए। सोरोंजी के सूर्योदय और सूर्यास्त के विशेष दृश्यों को भी शूट किया गया।
इसके अतिरिक्त, सहावर स्थित गामा देवी मंदिर, रामछितौनी में महर्षि वाल्मीकि आश्रम व गुफा, सीता कुंड तथा सीता-राम कुआं, गंजडुंडवारा के वनखंडेश्वर महादेव और पटियाली के राजा द्रुपद का किला, द्रोणाचार्य जन्मभूमि, पाटलावती पीठ, मेहदेश्वर महादेव, पाताली महादेव, बरदराज मंदिर, रंगजी मंदिर, गोपाल जी मंदिर सहित कई अन्य स्थलों का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। दरियावगंज स्थित गुरु द्रोणाचार्य की गौखुर झील और मार्कण्डेय ऋषि आश्रम को भी इस दस्तावेजीकरण में शामिल किया गया है।
यह बुकलेट कासगंज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी और उत्तर प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी।
