कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भारतीय क्रिकेट टीम को दक्षिण अफ्रीका के हाथों 30 रनों से करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ ही भारत ने...
कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भारतीय क्रिकेट टीम को दक्षिण अफ्रीका के हाथों 30 रनों से करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ ही भारत ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज 0-1 से गंवा दी। भारतीय बल्लेबाज टर्निंग ट्रैक पर पूरी तरह संघर्ष करते नजर आए, जिसके बाद हार का ठीकरा पिच पर फोड़ा जाने लगा। हालांकि, भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया।
दरअसल, मैच से पहले कोच गौतम गंभीर ने स्वयं एक टर्निंग ट्रैक की मांग की थी, ताकि मेहमान टीम को स्पिन के जाल में फंसाया जा सके। लेकिन मैच में पासा पलट गया और खुद भारतीय बल्लेबाज स्पिन के सामने कमजोर साबित हुए। मैच खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने पिच को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा, “हमने जैसी पिच मांगी थी, हमें वैसी ही मिली। इस पिच में कोई दिक्कत नहीं थी। अगर आप मानसिक रूप से मजबूत हैं और सही डिफेंस खेलते हैं, तो इस विकेट पर रन बनाए जा सकते थे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि हार का कारण बल्लेबाजों की मानसिक मजबूती की कमी और उनकी बल्लेबाजी की कमजोरी थी।
इस मैच में भारत को 124 रनों के छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए महज 93/9 के स्कोर पर ऑलआउट होना पड़ा। कप्तान शुभमन गिल चोट के कारण बल्लेबाजी के लिए नहीं उतर सके, जिससे टीम की मुश्किलें और बढ़ गईं। यह टेस्ट क्रिकेट इतिहास में भारत का तीसरा सबसे कम स्कोर रहा। दक्षिण अफ्रीकी स्पिनर साइमन हार्मर ने कुल 8 विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजों को खूब परेशान किया और भारत के लिए तैयार की गई स्पिनिंग पिच पर मेहमान टीम ने बाजी मार ली।
मैच के दौरान बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि पिच बिल्कुल वैसी ही बनाई गई है, जैसी भारतीय टीम चाहती थी। यह भारत की पिछले छह घरेलू टेस्ट मैचों में चौथी हार है, जो टर्निंग ट्रैक्स पर मिली है। पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ भी भारत को ऐसी ही पिचों पर 0-3 से हार का सामना करना पड़ा था। इस हार ने एक बार फिर भारतीय बल्लेबाजों की स्पिन खेलने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोच गंभीर के बयान से साफ है कि वह हार के लिए पिच को नहीं, बल्कि टीम की मानसिक तैयारी और कौशल को जिम्मेदार मानते हैं।