इथियोपिया ज्वालामुखी राख से भारतीय एयरलाइंस को खतरा, DGCA ने जारी की एडवाइजरी
इथियोपिया के हेली गुब्बी ज्वालामुखी में लगभग 10,000 वर्षों के बाद हुए विस्फोट ने विमानन सुरक्षा के लिए एक नई चिंता पैदा कर दी है। ज्वालामुखी से निकली राख का विशाल गुबार मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में फैल गया है और अब उत्तरी भारत की ओर बढ़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने भारतीय एयरलाइंस के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।
DGCA द्वारा जारी एडवाइजरी में, यह स्पष्ट किया गया है कि टूलूज ज्वालामुखी राख सलाहकार केंद्र और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने पहले ही एक ज्वालामुखी राख एडवाइजरी और एक ASHTAM (Aviation Hazard Information) जारी कर दिया है। एयरलाइन ऑपरेटरों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी प्रभावित इलाकों और निर्धारित ऊंचाइयों से बचें। इसके अतिरिक्त, एयरलाइंस को अपने ऑपरेशनल मैनुअल में ज्वालामुखी राख से संबंधित प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और कॉकपिट तथा केबिन क्रू को नवीनतम जानकारी से अवगत कराने के लिए कहा गया है।
सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, एयरलाइंस को नवीनतम एडवाइजरी के आधार पर अपनी उड़ानों की योजना और रूटिंग को समायोजित करने, NOTAM (Notice to Airmen) और मौसम संबंधी अपडेट्स की लगातार निगरानी करने का भी निर्देश दिया गया है। साथ ही, विमानों के इंजनों में उतार-चढ़ाव या केबिन में असामान्य गंध जैसी किसी भी संदिग्ध राख की उपस्थिति की तुरंत रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है।
इस बीच, KLM रॉयल डच एयरलाइंस ने सुरक्षा चिंताओं के कारण अपनी एम्स्टर्डम-दिल्ली मार्ग की उड़ानें (KL 871) और दिल्ली-एम्स्टर्डम वापसी उड़ानें (KL 872) रद्द कर दी हैं। यह कदम ज्वालामुखी राख के कारण उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए उठाया गया है।
वहीं, अकासा एयर ने कहा है कि वह इथियोपिया में ज्वालामुखी की गतिविधि और आस-पास के इलाकों में उड़ान संचालन पर इसके संभावित प्रभाव पर बारीकी से नजर रख रही है। एयरलाइन ने आश्वासन दिया है कि उसकी टीमें अंतर्राष्ट्रीय विमानन सलाहों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार स्थिति का आकलन करती रहेंगी और आवश्यकतानुसार आवश्यक कदम उठाएंगी। अकासा एयर ने यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
यह ज्वालामुखी विस्फोट रविवार को हुआ, जिसके बाद लाल सागर के पार ओमान और यमन की ओर राख का एक बड़ा गुबार उठा और फिर पूर्व की ओर बह गया। अधिकारी राख के बादल की हरकतों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका असर भारत सहित अन्य देशों के विमानन मार्गों पर पड़ सकता है।
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