उत्तराखंड UCC: लिव-इन संबंधों में गोपनीयता बढ़ी, माता-पिता को सूचना अब अनिवार्य नहीं
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत लिव-इन संबंधों से जुड़ी नियमावली में बड़ा संशोधन किया गया है। राज्य सरकार ने ‘समान नागरिक संहिता चतुर्थ संशोधन नियमावली’ जारी की है, जिसके अनुसार अब लिव-इन में रहने वाले युगलों को अपने माता-पिता को इस संबंध की जानकारी देना अनिवार्य नहीं होगा। यह कदम निजता के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
पूर्व में लागू नियमावली के कई प्रावधानों पर उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें निजता के अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया था। इन याचिकाओं के बाद, गृह विभाग ने नियमावली में संशोधन किया है। संशोधित नियमों के तहत, पुलिस को भी लिव-इन संबंधों की सूचना केवल जानकारी के लिए दी जाएगी, न कि किसी हस्तक्षेप के उद्देश्य से। इसके अतिरिक्त, लिव-इन संबंध समाप्त होने पर युवती के गर्भवती होने या बच्चे के जन्म की सूचना देना भी अनिवार्य नहीं होगा। लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को मकान मालिक से प्रमाण पत्र लेने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है, जिससे प्रक्रिया और अधिक गोपनीय और सरल हो गई है।
उत्तराखंड में इसी वर्ष फरवरी से समान नागरिक संहिता लागू की गई थी, जिसके क्रियान्वयन के लिए नियमावली भी बनाई गई थी। हालांकि, शुरुआती नियमावली के कुछ प्रावधानों को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई थीं, विशेषकर गोपनीयता और व्यक्तिगत अधिकारों से संबंधित। उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद किए गए इन संशोधनों से अब युगल बिना किसी अनावश्यक दबाव के अपने संबंधों को पंजीकृत करा सकेंगे।
लिव-इन संबंधों के साथ-साथ विवाह पंजीकरण प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब विवाह पंजीकरण के लिए आधार कार्ड के अतिरिक्त पासपोर्ट, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी अन्य वैध पहचान पत्रों का भी उपयोग किया जा सकेगा। यह संशोधन विवाह पंजीकरण को अधिक सुलभ और लचीला बनाएगा, जिससे नागरिकों को सुविधा मिलेगी।
