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उत्तराखंड में ओएनजीसी की बड़ी खोज: 62 भू-तापीय स्रोत ऊर्जा की नई राह खोलेंगे

By Nov 24, 2025

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) ने उत्तराखंड को भू-तापीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहचान दिलाई है। कंपनी ने राज्य में 62 ऐसे स्थलों का पता लगाया है जहां भू-तापीय (जियोथर्मल) स्रोत उपलब्ध हैं और जिनसे भविष्य में ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। ओएनजीसी की यह पहल हरित ऊर्जा की दिशा में एक महत्वाकांक्षी कदम है, जो देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक हो सकती है।

ओएनजीसी ने इस सर्वे के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के साथ मिलकर काम किया है। कंपनी ने राज्य सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव भी सौंपा है और इस परियोजना के अध्ययन के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है। यह कदम उत्तराखंड की हाल ही में स्वीकृत जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी, 2025 के अनुरूप है। इस नीति का उद्देश्य इन प्राकृतिक गर्म जल स्रोतों का उपयोग न केवल बिजली उत्पादन के लिए करना है, बल्कि हीटिंग, कूलिंग और जल शुद्धिकरण जैसी बहुआयामी गतिविधियों के लिए भी करना है। इस प्रकार, यह पहल उत्तराखंड में भू-तापीय ऊर्जा को एक वास्तविकता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

जिन प्रमुख भू-तापीय क्षेत्रों की पहचान की गई है, उनमें बदरीनाथ का तप्तकुंड, यमुनोत्री का सांस्कृतिक स्थल, और तपोवन का तप्त कुंड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी, यमुना और टौंस नदी घाटियों के क्षेत्रों को भी चिह्नित किया गया है। ये सभी प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत 1000 से 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं और इनका तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से 90 डिग्री सेल्सियस तक पाया गया है।

राज्य सरकार ने इस नीति के तहत परियोजनाओं को 30 साल तक के लिए लाइसेंस देने की व्यवस्था की है। सार्वजनिक और निजी दोनों तरह की कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बोली (बीडिंग) प्रक्रिया के माध्यम से इन परियोजनाओं को आवंटित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होगी।

हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों और भू-वैज्ञानिकों ने कुछ चिंताएं भी व्यक्त की हैं। हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी, भूकंपीय गतिविधि का खतरा, जल स्रोतों पर संभावित दबाव और भूमि धंसाव जैसे जोखिमों को देखते हुए अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पहाड़ों की विशिष्ट भू-आकृति, बिजली पारेषण की क्षमता की सीमाएं, स्थानीय समुदायों के साथ भूमि उपयोग संबंधी विवाद और वन एवं पर्यावरण की संवेदनशीलता जैसी चुनौतियां इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन में बाधा बन सकती हैं।

ओएनजीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय मुखर्जी ने बताया, ‘ओएनजीसी ने उत्तराखंड में 62 स्थलों की पहचान की है जहां भू-तापीय स्रोत उपलब्ध हैं और जिनसे ऊर्जा उत्पादन की संभावना है। ओएनजीसी ने जीएसआई के साथ मिलकर यह सर्वे किया है। इस परियोजना की पारिस्थितिक संवेदनशीलता का भी अध्ययन किया जा रहा है।’ यह परियोजना राज्य के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में स्थिरता और स्थानीय विकास दोनों को बढ़ावा देने की क्षमता रखती है।

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