आगरा में पोनसेटी तकनीक से टेढ़े पैर का सफल इलाज, 95% बच्चों को मिला नया जीवन
आगरा में जन्मजात टेढ़े पैर की समस्या से जूझ रहे बच्चों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। एसएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पोनसेटी तकनीक के इस्तेमाल से इलाज में अभूतपूर्व सफलता मिली है। एक अध्ययन के अनुसार, इस तकनीक से इलाज कराए गए 331 बच्चों में से 95 प्रतिशत पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं और सामान्य बच्चों की तरह चल-फिर पा रहे हैं। यह तकनीक नवजात शिशुओं के लिए विशेष रूप से प्रभावी पाई गई है।
पोनसेटी तकनीक से इलाज के नतीजे
एसएन मेडिकल कॉलेज में 2023 से 2026 तक किए गए इस अध्ययन में 331 बच्चों को शामिल किया गया, जिनमें से 219 के दोनों पैर और 112 के एक पैर में टेढ़ापन था। अधिकांश बच्चों का इलाज जन्म के सात से 10 दिन के भीतर शुरू कर दिया गया था। इस प्रक्रिया में बच्चे के पैर को धीरे-धीरे खींचकर सीधा किया जाता है और फिर प्लास्टर लगाया जाता है। हड्डियों और मांसपेशियों की लचीलेपन के कारण यह संभव हो पाता है।
लंबी चलने वाली प्रक्रिया
इस इलाज में करीब आठ से 10 प्लास्टर लगाए जाते हैं। पैर सीधा होने के बाद भी उसे उसी स्थिति में बनाए रखने के लिए विशेष बूट या ब्रेसेस का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे धीरे-धीरे कम समय के लिए पहनाया जाता है। करीब दो से तीन साल की उम्र तक 95 प्रतिशत बच्चे सामान्य रूप से चलने लगते हैं और खेलकूद जैसी गतिविधियों में भी भाग ले पाते हैं।
टेढ़े पैर के कारण
जन्मजात टेढ़े पैर की समस्या के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें आनुवंशिक कारण प्रमुख हैं। यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही हो, तो बच्चों में भी इसकी संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, गर्भाशय में शिशु के लिए जगह कम होने या न्यूरोमस्कुलर समस्याओं के कारण भी पैर टेढ़े हो सकते हैं। समय पर इलाज न कराने पर यह समस्या उम्र के साथ और बढ़ सकती है, जिससे बाद में सर्जरी भी पूरी तरह सफल नहीं हो पाती।
