सर्बिया में छात्र आंदोलन ने पलटी बाजी, पुतिन समर्थित राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की करारी हार | world news
सर्बिया की राजनीति में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। देश की सत्ता पर लंबे समय से काबिज ताकतवर नेता और राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने रविवार को हुए चुनावों में अपनी हार स्वीकार कर ली है। पिछले दो वर्षों से उनकी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और तानाशाही रवैये को लेकर उग्र विरोध प्रदर्शन चल रहे थे, जिसकी अगुवाई देश के युवा और विश्वविद्यालय के छात्र कर रहे थे।
बाल्कन क्षेत्र के इस देश में इस चुनाव को सबसे बड़े राजनीतिक फेरबदल के रूप में देखा जा रहा है। वुसिक ने लगभग 14 वर्षों तक सत्ता की बागडोर संभाली थी और उन्हें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का करीबी माना जाता था। चुनाव परिणामों के अनुसार, 250 सदस्यीय संसद में युवाओं के समर्थन वाली ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ को भारी बहुमत मिलता दिख रहा है, जिससे वुसिक की दक्षिणपंथी ‘सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी’ पिछड़ गई है।
यह पूरा राजनीतिक संकट साल 2024 में नोवी साद शहर में एक रेलवे स्टेशन की छत गिरने से हुई 16 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद शुरू हुआ था। इस दुर्घटना ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों को और तेज कर दिया, जिसके बाद जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। हार के बाद वुसिक ने अपनी पार्टी के समर्थकों को संबोधित करते हुए स्वीकार किया कि छात्र सूची को भारी संख्या में सीटें मिल रही हैं, हालांकि उन्होंने अपनी हार के लिए यूरोपीय देशों और अमेरिकी डीप स्टेट के कथित हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया। इस सत्ता परिवर्तन से देश की जनता में लोकतांत्रिक सुधारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
