SIR कार्य के दबाव से शिक्षक परेशान, गाजियाबाद में बढ़ाई जाए समयावधि: शिक्षक संघ
उत्तर प्रदेश में शिक्षकों पर एसआईआर (SIR) कार्य के बढ़ते दबाव ने उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। इस गंभीर समस्या को लेकर गाजियाबाद के शिक्षक संघ ने निर्वाचन कार्य की समयावधि बढ़ाने की पुरजोर मांग उठाई है। संघ का कहना है कि एसआईआर कार्य के अत्यधिक बोझ के कारण शिक्षक मानसिक रूप से काफी परेशान हो रहे हैं, जिसके चलते उनमें उच्च रक्तचाप, शुगर और अनिद्रा जैसी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें सामने आ रही हैं। इस मामले में शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर कार्य की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया है, ताकि शिक्षकों को इस मुश्किल घड़ी में कुछ राहत मिल सके।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने एसआईआर कार्य की समयावधि बढ़ाने की मांग करते हुए कहा है कि गाजियाबाद में दो हजार से अधिक शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निर्वाचन नामावली से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्य में बीएलओ (BLO) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कार्य के अत्यधिक दबाव और देर रात तक चलने वाले काम के घंटों के कारण उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। शिक्षकों द्वारा बताई जा रही अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर (हाईबीपी) और हाइपरटेंशन की शिकायतें चिंताजनक हैं। सूत्रों के अनुसार, काम के इस अत्यधिक दबाव के चलते प्रदेश में पहले भी कई बीएलओ की मौत हो चुकी है।
इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए, नोएडा में दो शिक्षकों ने कार्यभार से मुक्ति पाने के लिए त्यागपत्र तक दे दिया है। गाजियाबाद में ऐसी किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना से बचने और शिक्षकों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से निजात दिलाने के उद्देश्य से, शिक्षक संघ ने जिलाधिकारी से अपील की है। संघ ने भारत निर्वाचन आयोग से भी इस मामले में संज्ञान लेने और एसआईआर कार्य की समयावधि आगे बढ़ाने की मांग की है, ताकि शिक्षकों को कुछ अतिरिक्त समय मिल सके और वे अपने स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दे सकें।
शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ने बताया कि एसआईआर कार्य के लिए चार दिसंबर की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। इसके चलते शिक्षक देर शाम तक बीएलओ का कार्य करते हैं और रात में जागकर एसआईआर का डेटा भरने का काम कर रहे हैं। इस कारण उनके स्वास्थ्य पर लगातार प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने पुनः मांग की है कि एसआईआर की समय अवधि निश्चित रूप से बढ़ाई जानी चाहिए।
