शौचालयों की बदहाली पर उप निदेशक सख्त, रिपोर्ट तलब
गोरखपुर मंडल में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत निर्मित व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालयों की दयनीय स्थिति को लेकर उप निदेशक पंचायत हिमांशु शेखर ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाया है। दैनिक समाचार पत्र में इस अव्यवस्था पर खबर प्रकाशित होने के तत्काल बाद, उन्होंने मंडल के सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।
सामुदायिक शौचालयों के संबंध में जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में बने शौचालयों के सुचारू संचालन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों की एक सदस्य को केयरटेकर नियुक्त किया गया है। उन्हें प्रतिमाह 6000 रुपये पारिश्रमिक और 3000 रुपये रखरखाव के लिए दिए जाते हैं। इसके बावजूद, निरीक्षणों के दौरान और समाचार माध्यमों से मिली शिकायतों में जगह-जगह गंदगी, शौचालयों का बंद पाया जाना, पानी और बिजली की कमी तथा नियमित सफाई का अभाव सामने आया है, जिसे उप निदेशक ने ‘निंदनीय और चिंता का विषय’ करार दिया है।
उप निदेशक ने मंडल के सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तत्काल एक निरीक्षण टीम गठित करें और अपने-अपने जनपदों में सभी सामुदायिक शौचालयों का स्थलीय सत्यापन सुनिश्चित करें। प्रत्येक शौचालय पर यूजर रजिस्टर का रखरखाव, समय पर खुलना-बंद होना और केयरटेकर को मानदेय का समय पर भुगतान अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में तीन दिनों के भीतर संपूर्ण कार्यवाही रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
इसी प्रकार, चार-पांच वर्ष पूर्व बने व्यक्तिगत शौचालयों की बदहाल स्थिति पर भी उप निदेशक ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत बड़ी संख्या में बनाए गए इन शौचालयों की रेट्रोफिटिंग (मरम्मत) के लिए पूर्व में 5000 रुपये तक की सीमा तय की गई थी और इसके लिए एक पोर्टल पर निगरानी की व्यवस्था भी की गई थी। इसके बावजूद, कई ग्राम पंचायतों में दरवाजे गायब, फर्श और सीट टूटी हुई, छत टपकना और पाइपलाइन खराब मिलने जैसी गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कुछ लाभार्थियों ने तो क्षतिग्रस्त शौचालयों का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया है।
इस स्थिति को रेट्रोफिटिंग कार्य के सही ढंग से न होने का स्पष्ट संकेत मानते हुए, उप निदेशक ने इस मामले में भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। मंडल के सभी जनपदों से कहा गया है कि वे 15 दिनों के भीतर एक टीम बनाकर रेट्रोफिटिंग किए गए शौचालयों का लाभार्थीवार स्थलीय निरीक्षण कराएं और विस्तृत रिपोर्ट मिशन कार्यालय को भेजें। साथ ही, पोर्टल पर की गई किसी भी फर्जी रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सभी टूटे-फूटे और ध्वस्त व्यक्तिगत शौचालयों की मरम्मत तत्काल कराए जाने और इस संबंध में तीन दिनों में प्रारंभिक कार्यवाही रिपोर्ट भेजने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
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